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चुनाव आयोग के खिलाफ राहुल गांधी की याचिका में 14 खामियां, सुप्रीम कोर्ट में सुधार जरूरी

चुनाव आयोग के खिलाफ राहुल गांधी की याचिका में 14 खामियां, सुप्रीम कोर्ट में सुधार जरूरी

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तरफ से चुनाव आयोग के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में रजिस्ट्री ने 14 खामियां पाई हैं। इन कमियों को ठीक किए बिना याचिका की सुनवाई नहीं हो सकेगी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में तब तक सूचीबद्ध नहीं होगा जब तक सभी त्रुटियां दुरुस्त नहीं हो जातीं।

याचिका में मिली तकनीकी गलतियां

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में दस्तावेज तैयार करने व फॉर्मेटिंग की गलतियां पाई हैं। इनमें प्रतिवादियों के नामों का सही उल्लेख न होना, पुराने फैसले की कॉपी न लगाना तथा 9 याचिकाकर्ताओं के वकालतनामा न देना शामिल है। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आईडी कार्ड की कॉपी धुंधली थी और कोर्ट फीस में 220 रुपए की कमी मिली है। ये खामियां ठीक किए बिना सुनवाई संभव नहीं है।

रजिस्ट्री का निर्देश है कि याचिका में दाखिल दस्तावेज स्पष्ट और पूरी तरह सही होने चाहिए ताकि प्रक्रिया में देरी न हो। सभी आवश्यक दस्तावेजों के सही प्रावधान के बाद ही केस को सूचीबद्ध किया जाएगा।

याचिका और इसके पक्षकार

यह याचिका 12 अक्टूबर को शाम 4:37 बजे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई थी। याचिका राहुल गांधी सहित विपक्षी इंडिया गठबंधन के 11 नेताओं की तरफ से संयुक्त रूप से दायर की गई है। इसमें सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एमए बेबी, डी. राजा, महुआ माजी, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर भी शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं की पैरवी अधिवक्ता प्रसन्ना एस. कर रहे हैं।

याचिका में कुल चार प्रतिवादी बनाए गए हैं, जिनमें भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) प्रमुख है। अन्य प्रतिवादियों में चुनाव आयोग के अधिकारी ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी हैं।

सूत्रों के अनुसार, याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका के संपूर्ण विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं, लेकिन यह माना जा रहा है कि इसमें हाल के चुनावों में अनियमितताओं, मतदाता सूची एवं चुनाव प्रक्रिया की समस्याओं का जिक्र है।

तालिका तैयार करने, दस्तावेजों की सफाई और समेकन करने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी। इस प्रक्रिया में तकनीकी कमियों के सुधार पर जोर दिया गया है ताकि कानूनी प्रक्रिया को सुचारु बनाया जा सके।

अभी तक अदालत की ओर से याचिका की मुख्य कॉपी सार्वजनिक नहीं हुई है। लेकिन विपक्षी नेताओं द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाने से राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। इस याचिका को देखते हुए आगामी सुनवाई में कई अहम मुद्दे उजागर हो सकते हैं।

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