दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

नवरात्रि व्रत पारण: 19 अक्टूबर को अष्टमी-नवमी का संगम, पहले करें कन्या पूजन या हवन?

नवरात्रि व्रत पारण: 19 अक्टूबर को अष्टमी-नवमी का संगम, पहले करें कन्या पूजन या हवन?

शारदीय नवरात्रि में इस बार 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी तिथियों का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। सुबह तक अष्टमी तिथि रहेगी और इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस खास संयोजन को लेकर श्रद्धालुओं के मन में कई सवाल उठ रहे हैं कि कन्या पूजन किस दिन करना चाहिए, हवन कब किया जाए और व्रत पारण का सही समय क्या है।

19 अक्टूबर को अष्टमी-नवमी तिथि का संगम

पंचांग के अनुसार, 19 अक्टूबर 2026 को सोमवार को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी, जो 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक बनी रहेगी। इसका मतलब है कि 19 अक्टूबर की शुरुआत में अष्टमी तिथि के अंतर्गत पूजा की जा सकती है और उसके बाद नवमी तिथि में भी पूजा की जा सकती है। जो भक्त अष्टमी तिथि में कन्या पूजन करना चाहते हैं, उन्हें यह पूजा अष्टमी तिथि समाप्त होने से पहले पूरी करनी चाहिए। वहीं कुछ भक्त नवमी तिथि शुरू होने के बाद कन्या पूजन कर सकते हैं। इस वर्ष दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

कन्या पूजन या हवन पहले?

नवरात्रि के दौरान हवन और कन्या पूजन दोनों बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। परंपरा के अनुसार सबसे पहले मां दुर्गा का हवन किया जाता है जिससे पूजा विधिवत पूरी हो। हवन पूरी होने के बाद आरती की जाती है और तत्पश्चात कन्या पूजन किया जाता है। कन्याओं के पैर धोकर उनका तिलक करते हैं और फिर उन्हें हलवा, पूरी और काले चने का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद कन्याओं को दक्षिणा देते हुए उनका सम्मान किया जाता है। इसलिए हवन पहले करना शुभ माना जाता है।

अष्टमी तिथि में कन्या पूजन करने वाले भक्तों को 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 बजे से पहले पूजा पूरी करनी होगी। नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने वाले नवीनीकृत नवमी तिथि शुरू होने के बाद पूजा कर सकते हैं। इस तरह दो तिथियों के संयोग के कारण पूजा का क्रम महत्वपूर्ण होता है।

व्रत पारण के लिए भी सही समय निर्धारित किया गया है। इस साल अष्टमी व्रत का पारण 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 6:53 बजे या फिर 7:53 बजे के बाद किया जा सकता है। नवमी व्रत का पारण 20 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:35 बजे के बाद किया जाएगा। लेकिन अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना आवश्यक है।

व्रत समाप्त करने से पहले हवन और कन्या पूजन पूरी तरह संपन्न होना चाहिए। इसके बाद माँ दुर्गा को भोग लगाकर श्रद्धापूर्वक व्रत खोला जाता है। यह प्रक्रिया नवरात्रि व्रत की पूरी श्रद्धा और परंपरा को दर्शाती है।

इस बार अष्टमी और नवमी तिथियों का संगम होने से पूजा विधि और व्रत पूजन का समय लेकर भक्तों को ज्यादा जागरूकता और सावधानी बरतनी होगी। सही समय और विधि के अनुसार पूजा करने से शुभता बढ़ती है और त्योहार का माहौल भक्तिमय बनता है।

सावधानी एवम् परामर्श: व्रत पूजन और पारण का समय स्थानिक पंचांग के अनुसार जांच कर ही पूजा करें। यह खबर धार्मिक मान्यताओं एवं सामान्य जानकारी पर आधारित है।

Source

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!