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केरल वन विभाग ने चिन्नाक्कनाल में जंगली हाथियों की आवाजाही पर लगी बाड़ें और लोहे की छड़ें हटा दीं

केरल वन विभाग ने चिन्नाक्कनाल में जंगली हाथियों की आवाजाही पर लगी बाड़ें और लोहे की छड़ें हटा दीं

देविकुलम के पन्थाडिकलम जनजातीय बस्ती में वन अधिकारियों, जनजातीय निवासियों और लोगों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। यह निर्णय खासतौर से उस दुखद घटना के बाद आया है जिसमें एक जनजातीय कृषक की मौत हो गई थी। मृतक के परिवार और समुदाय के सदस्यों ने वन विभाग से जंगली हाथियों के आवागमन में बाधा डालने वाली बाड़ों और लोहे की छड़ों को हटाने की मांग की थी।

इस मुद्दे पर हुई चर्चा में सभी पक्षों ने सामूहिक रूप से सहमति जताई कि हाथियों के पारिस्थितिक संतुलन और जनजातीय समुदाय के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना आवश्यक है। वन विभाग ने इस संदर्भ में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि वन्य जीवों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय जनजातीय आबादी के हितों की रक्षा प्राथमिकता है।

वन अधिकारियों ने बताया कि चिन्नाक्कनाल क्षेत्र में लगाए गए लोहे की छड़ें और बाड़ें हाथी परिवारों की आवाजाही में बाधक साबित हो रही थीं। इससे न केवल हाथियों की प्राकृतिक गतिशीलता प्रभावित हो रही थी, बल्कि इस वजह से स्थानीय किसानों को भी नुकसान हो रहा था। हाल ही में हुई बैठक में स्थानीय जनजातीय प्रतिनिधियों ने वन विभाग को स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि भविष्य में इस प्रकार की बाधाएं नहीं लगाई जाएंगी और जंगली हाथियों के आवागमन के लिए स्पष्ट मार्ग सुनिश्चित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, वन विभाग द्वारा आवश्यक निगरानी और सुरक्षा प्रबंध किए जाएंगे ताकि वन्य जीवों और मानव समुदाय के बीच संघर्ष को कम किया जा सके।

स्थानीय लोगों और जनजातीय समुदाय के सदस्यों ने इस पहल को स्वागतयोग्य बताया है। उनका मानना है कि यह निर्णय जंगली हाथियों और मानव निवासियों दोनों की सुरक्षा एवं सहअस्तित्व को सुनिश्चित करेगा। वन विभाग का यह कदम क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण की दिशा में एक मिसाल माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि केरल में वन्य जीवन और मानव जनसंख्या के बीच संतुलन बनाना हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। ऐसे मामलों में संवाद और सामूहिक निर्णय लेना ही समस्या का स्थायी समाधान प्रदान कर सकता है। पन्थाडिकलम में इस तरह की पहल से उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में वन्य जीवन और जनजातीय आबादी के बीच बेहतर समझ और सहयोग स्थापित होगा।

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