दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

भारतीय शोधकर्ताओं का टूटता अमेरिकी सपना, ट्रंप सरकार का J-1 वीजा पर निशाना

भारतीय शोधकर्ताओं का टूटता अमेरिकी सपना, ट्रंप सरकार का J-1 वीजा पर निशाना

भारतीय शोधकर्ताओं के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद होने लगे हैं और उनका ‘अमेरिकन ड्रीम’ खतरे में है। यह स्थिति तब बनी है, जब अमेरिका की ट्रंप सरकार ने J-1 एक्सचेंज वीजा प्रोग्राम की समीक्षा शुरू कर दी है। यह वीजा मुख्यतः भारतीय शोधकर्ताओं को अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पीएचडी करने के लिए मिलता है।

J-1 वीजा के तहत हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र और शोधकर्ता अमेरिका जाते हैं। इस वीजा से वे अमेरिकी विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों में काम करते हैं, जिससे भारत और अमेरिका के बीच शैक्षिक और वैज्ञानिक सहयोग में वृद्धि होती है।

जांच की वजह और मुद्दे

ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड, स्टैनफर्ड, और MIT समेत नौ प्रमुख विश्वविद्यालयों में J-1 वीजा के संभावित दुरुपयोग की जांच शुरू की है। आरोप है कि ये संस्थान इस वीजा का इस्तेमाल बढ़ा-चढ़ाकर करते हैं, जिसकी वजह से अमेरिका के नागरिकों और स्थानीय शोधकर्ताओं को नुकसान हो सकता है।

जांच में यह भी सामने आया है कि इन विश्वविद्यालयों में विदेशी शोधकर्ताओं को अमेरिकी शोधकर्ताओं से लगभग 20,000 डॉलर कम वेतन दिया जाता है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल ग्रांट के तहत आयोजित रिसर्च प्रोजेक्ट्स में भी नियमों के उल्लंघन का शक है।

भारतीय शोधकर्ताओं पर प्रभाव

इंडियन शोधकर्ताओं के बीच इस जांच की खबर फैलते ही चिंता बढ़ गई है। कई लोग अपने अमेरिका जाने के प्लान पर पुनर्विचार कर रहे हैं। शोध फंडिंग में कमी और वीजा अवधि को लेकर अनिश्चितता से उनकी एकेडमिक योजनाओं पर असर पड़ा है।

एक IIT ग्रेजुएट ने बताया कि रिसर्च प्रपोजल तैयार करने के बाद भी अनिश्चितताओं के कारण उसने अमेरिका में प्रवेश लेने से परहेज किया है। इस तरह की स्थिति कई युवा वैज्ञानिकों में देखने को मिल रही है।

अमेरिका में भारतीय शोधकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ‘ओपन डोर्स रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, 2024-25 में अमेरिका में चीनी शोधकर्ताओं के बाद भारतीय रिसर्चर्स दूसरे नंबर पर थे। यह आंकड़ा बढ़कर 19,156 हो गया है, जो पिछले साल की तुलना में 8% अधिक है।

हालांकि, इस जांच और नियमों की समीक्षा से भारतीय शोधकर्ताओं के लिए अमेरिका में अध्ययन और काम करने की राह कठिन होती जा रही है। इससे भारत में भी कई शोधकर्ता अन्य देशों की ओर रुख कर सकते हैं।

Source

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!