दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

नई दिल्ली: सात दिन बाद सौरव दास और आशुतोष रांका रिहा, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं करने का दिया आश्वासन

नई दिल्ली, दिल्ली। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका को सात दिन जेल में रहने के बाद एसईएम कोर्ट से रिहाई मिल गई है। अदालत ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और जमानती मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। रिहाई से पहले दोनों ने लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति भंग करने वाली किसी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे और कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे।

अदालत में दोनों ने न्यायपालिका तथा विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट न्यायालय के प्रति विश्वास जताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे भविष्य में ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे, जिससे सार्वजनिक शांति प्रभावित हो या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा हो।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर स्पष्ट शर्त

सौरव दास और आशुतोष रांका ने अदालत को बताया कि जब तक जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन को प्रतिबंधित करने वाला आदेश कानून के अनुसार लागू रहेगा, तब तक वे वहां प्रदर्शन करने के लिए कोई आह्वान नहीं करेंगे। यदि आगे किसी प्रदर्शन का आयोजन किया जाता है, तो वह संविधान के दायरे में रहकर किया जाएगा।

अदालत ने दोनों को अपने मुचलकों और लिखित आश्वासनों की सभी शर्तों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया। उन्हें यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि उनकी किसी गतिविधि से सार्वजनिक शांति या कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

रिहाई के बावजूद मामला जारी रहेगा

अदालत ने स्पष्ट किया कि हिरासत से रिहाई का आदेश मामले को समाप्त नहीं करता है। इस प्रकरण में जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी और आगे की सुनवाई भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगी। इसलिए दोनों को मिली राहत को मामले से पूरी तरह बरी होना नहीं माना जा सकता।

अदालत ने सौरव दास, आशुतोष रांका और उनके जमानतदारों को 23 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे फिर से पेश होने का निर्देश दिया है। दोनों को अगली सुनवाई सहित प्रत्येक निर्धारित तारीख पर अदालत में उपस्थित रहना होगा।

अदालत ने माना कि दोनों की ओर से दिए गए मुचलके और लिखित आश्वासन फिलहाल शांति तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी एहतियाती उपाय सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त हैं। इसी आधार पर इस स्तर पर आगे न्यायिक हिरासत आवश्यक नहीं समझी गई।

अब मामले में अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी। दोनों को अदालत की ओर से निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा और जांच में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!