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कोच्चि, केरल: नाबालिग की मर्सिडीज से मौत के मामले में कार्रवाई तेज, जज के खिलाफ कानूनी प्रावधान जोड़ा; चार पुलिसकर्मी सस्पेंड

कोच्चि, केरल: केरल में मर्सिडीज-बेंज कार की टक्कर से 55 वर्षीय जयबालाकृष्णन की मौत के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवालों के बाद राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। दुर्घटना के समय कार कथित तौर पर एक 17 वर्षीय नाबालिग चला रहा था। वाहन के मालिक जज के खिलाफ भी प्राथमिकी में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए जोड़ी गई है। वहीं, जांच में कथित खामियों को लेकर चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।

गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला के निर्देश पर मंगलवार को प्राथमिकी में यह धारा शामिल की गई। मोटर वाहन अधिनियम के इस प्रावधान के तहत नाबालिग के वाहन चलाने से जुड़े मामले में उसके अभिभावक या वाहन मालिक की जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकती है। सरकार की कार्रवाई मृतक के परिवार की उन शिकायतों के बाद हुई है, जिनमें पुलिस पर आरोपी पक्ष के प्रति नरमी बरतने का आरोप लगाया गया था।

जांच में खामियों की बात स्वीकार

गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने विधानसभा में माना कि मामले की जांच में कमियां रही हैं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि जज होने के आधार पर किसी को विशेष राहत नहीं दी जाएगी।

निलंबित पुलिसकर्मियों में सर्कल इंस्पेक्टर श्याम कुमार केएस, सब-इंस्पेक्टर विश्वजीत, ग्रेड सब-इंस्पेक्टर मनोज केटी और सिविल पुलिस अधिकारी अरुण जोशी शामिल हैं। इन अधिकारियों पर कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब दुर्घटना के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

परिवार ने पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

मृतक जयबालाकृष्णन के परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने जज और उनके नाबालिग बेटे के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। परिवार का कहना है कि शुरुआती प्राथमिकी में दुर्घटना से संबंधित उचित कानूनी धाराएं नहीं जोड़ी गईं और आरोपी को जल्द जमानत दिलाने की कोशिश की गई।

परिवार ने पुलिस थाने के सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने आरोपी की मदद की और मोबाइल फोन से तस्वीरें हटवाने में भूमिका निभाई। इन शिकायतों की जांच के लिए एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) पी. विजयन कोच्चि भेजे गए।

जमानत पर दोबारा विचार की तैयारी

गृह मंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया है कि नाबालिग को मिली जमानत रद्द कराने के लिए सत्र न्यायालय में याचिका दायर की जाए। इस कदम का उद्देश्य मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया को अदालत के समक्ष रखना है। जमानत रद्द करने का अंतिम निर्णय न्यायालय ही करेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, जमानत मिलने के बाद नाबालिग ने तेज गति से वाहन चलाने से संबंधित वीडियो हटा दिए और अपना इंस्टाग्राम अकाउंट निजी कर लिया। हालांकि, इन गतिविधियों और दुर्घटना के मामले के बीच संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बाद अब पुलिस जांच की निष्पक्षता, परिवार की शिकायतों और दुर्घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। मामले में आगे की कार्रवाई जांच एजेंसियों और अदालत के निष्कर्षों के अनुसार तय होगी।

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