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केंद्र सरकार के सामने 3.56 लाख मुकदमों के निस्तारण की चुनौती, 41 मंत्रालयों में नहीं गठित हुई लीगल सेल

सहारनपुर, उत्तर प्रदेश।

केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों पर पुराने मुकदमों का भारी बोझ है। पांच साल से अधिक समय से लंबित 3,56,215 मामलों के निस्तारण को लेकर सरकार ने अब प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा तेज कर दी है। इस दौरान यह भी सामने आया कि 41 मंत्रालयों और विभागों ने अभी तक लीगल मैनेजमेंट सेल (एलएमसी) का गठन नहीं किया है। सरकार ने सभी संबंधित विभागों को नवंबर के अंत तक सेल बनाने के निर्देश दिए हैं।

कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने मंत्रालयों के सचिवों के साथ बैठक कर लिटिगेशन गवर्नेंस की स्थिति की समीक्षा की। समीक्षा में पता चला कि कुल लंबित मामलों में से 1,05,809 मुकदमे देश के 19 उच्च न्यायालयों में चल रहे हैं। इन मामलों के कारण सरकारी विभागों को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में शामिल रहना पड़ रहा है।

राजस्व विभाग में सबसे अधिक मुकदमे

लंबित मुकदमों की संख्या में राजस्व विभाग सबसे ऊपर है। इस विभाग से जुड़े 1,27,675 मामले लंबित हैं। वहीं रेलवे मंत्रालय में 45,583, डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स में 32,464, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में 28,822 और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में 27,109 मुकदमे दर्ज हैं।

इसके अलावा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में 14,331, रक्षा विभाग में 13,373, गृह विभाग में 9,658, डाक विभाग में 6,792 और दूरसंचार विभाग में 5,242 मामले लंबित हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम भी नहीं हो सका आयोजित

समीक्षा में मंत्रालयों की ओर से प्रशासनिक स्तर पर देरी का एक और मामला सामने आया। लिटिगेशन गवर्नेंस के तहत अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए सितंबर 2026 में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन विभागों ने अधिकारियों के नाम ही नहीं भेजे। इसके चलते प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित नहीं हो सका।

नवंबर में शुरू होगा नया पोर्टल

सरकार इसी महीने लिटिगेशन मैनेजमेंट पोर्टल लॉन्च करने की तैयारी में है। इसके माध्यम से सभी मंत्रालयों और विभागों के लंबित मामलों की जानकारी एक जगह उपलब्ध होगी। पोर्टल पर लीगल मैनेजमेंट सेल की कार्यप्रणाली, मुकदमों की स्क्रीनिंग, मध्यस्थता, अपील और निस्तारण की समीक्षा की जाएगी।

सरकार ने विभागों को ऐसे मुकदमों की पहचान करने को भी कहा है, जिन्हें जनविश्वास कानून के प्रावधानों और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत वापस लिया जा सकता है। इसके अलावा नए मुकदमे दायर करने से पहले उपयुक्त मामलों में मध्यस्थता और आपसी समझौते की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए हैं।

इस पहल का उद्देश्य अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करना और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

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