दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

बंधुआ मजदूरी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, छह महीने में लागू करनी होगी SOP और पुनर्वास योजना

नई दिल्ली, दिल्ली। बंधुआ मजदूरी के खिलाफ बने कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि बंधुआ मजदूरी पर संवैधानिक प्रतिबंध और इससे निपटने के लिए बनाए गए कानून केवल कागजी आश्वासन बनकर नहीं रह सकते। इनका लाभ वास्तविक रूप से पीड़ित मजदूरों तक पहुंचना चाहिए।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छह महीने के भीतर मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और पुनर्वास योजना पूरी तरह लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराना ही सरकार की पूरी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उसके बाद मजदूर का पुनर्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

रिहाई के बाद आर्थिक सहायता जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी मजदूर को बंधुआ मजदूरी से मुक्त करा देना पर्याप्त नहीं है। यदि उसे समय पर आर्थिक सहायता और सम्मानजनक जीवन जीने के साधन उपलब्ध नहीं कराए जाते, तो आर्थिक मजबूरी उसे दोबारा शोषण और बंधुआ मजदूरी की स्थिति में पहुंचा सकती है।

पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि मजदूरों को रिहाई के बाद वित्तीय सहायता देने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। अदालत के निर्देश के अनुसार, मजदूर की रिहाई के सात दिनों के भीतर वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

पहचान, मुक्ति और पुनर्वास एक ही प्रक्रिया के हिस्से

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बंधुआ मजदूरी से जुड़े मामलों में पीड़ित की पहचान करना, उसे शोषण से मुक्त कराना और उसका पुनर्वास करना अलग-अलग जिम्मेदारियां नहीं हैं। ये सभी एक निरंतर संवैधानिक दायित्व के महत्वपूर्ण चरण हैं।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, यदि रिहाई के बाद मजदूर को रोजगार, आर्थिक सहायता और सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी साधन नहीं मिलते हैं, तो उसके दोबारा शोषण का खतरा बना रहता है।

सरकारों को छह महीने की समयसीमा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छह महीने के भीतर SOP और पुनर्वास योजना लागू करने का निर्देश दिया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए लोगों को वास्तविक सहायता उपलब्ध कराना और उन्हें दोबारा इस व्यवस्था में फंसने से बचाना है।

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!