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14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को गर्भसमापन की अनुमति, दीपावली की छुट्टी में भी खुला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के मामले में दीपावली की छुट्टी के बावजूद विशेष सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने 14 वर्षीय बच्ची को 26 सप्ताह और एक दिन का गर्भ चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति प्रदान की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को अदालत की कार्यवाही आयोजित की गई।

 

न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने कमलाराजा अस्पताल और जीआर मेडिकल कॉलेज के डीन को अनुभवी डॉक्टरों की टीम गठित करने और आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए। यह मामला शिवपुरी जिले का है। वहां की ट्रायल कोर्ट ने गर्भसमापन के संबंध में उचित दिशा-निर्देश प्राप्त करने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण

मामले की सुनवाई के दौरान मेडिकल बोर्ड की पहली रिपोर्ट में कहा गया था कि उचित चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता के साथ गर्भसमापन संभव है। हालांकि, रिपोर्ट में इस संबंध में स्पष्ट राय नहीं दी गई थी। इसके बाद अदालत ने बोर्ड से दोबारा जानकारी मांगी।

दूसरी रिपोर्ट में मेडिकल बोर्ड ने बताया कि नाबालिग की ईको रिपोर्ट सामान्य है। साथ ही रक्त की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बनाने का आदेश

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रक्रिया के लिए स्त्री एवं प्रसूति रोग, एनेस्थीसिया, मेडिसिन और शिशु रोग विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम गठित की जाए। अदालत ने प्रक्रिया से पहले पीड़िता की आवश्यक जांच दोबारा कराने और रक्तस्राव सहित अन्य संभावित चिकित्सकीय जटिलताओं से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने को कहा।

मेडिकल रिकॉर्ड और डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश

अदालत ने पीड़िता और उसके अभिभावकों को संभावित चिकित्सकीय जोखिमों की जानकारी देने के बाद कानून के अनुसार सहमति लेने का निर्देश दिया। इसके अलावा सभी मेडिकल रिकॉर्ड और संबंधित सैंपल सुरक्षित रखने को कहा गया है। आवश्यकता पड़ने पर डीएनए जांच के लिए सैंपल संरक्षित रखने का भी आदेश दिया गया।

दीपावली के अवकाश के दौरान हुई इस विशेष सुनवाई में अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और समय पर चिकित्सकीय निर्णय की आवश्यकता को ध्यान में रखा।

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