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बिना मूल्यांकन ही आहरण हो रहा पंचायत में निर्माण की राशि

 

 

 

पंचायत जैसे अपने नाम को ही प्रकट करता हैअर्थात इसका अर्थ है ‘झमेला’ अब झमेला किसी के साँथ भी हो सकता है फिर चाहे आम जनता हो या फिर पंचायत में कार्य करने वाला कोई वेंडर
पंचायत नामक इस फैक्ट्री में सेटिस्फेक्शन के कोई गारंटी नही दी जाती चाहे फिर वो जिला प्रमुख हों जनपद प्रमुख हों या फिर विकास को विकाशसील करने से लेकर विकसित करने का जिम्मा उठाने वाला पंचायत…
हमने पंचायत नाम की तीनों वेब सीरीज देखी है आप भी देखिए ताकि पता चल सके कि एक पंचायत में सरपंच,सचिव और अन्य पंचायत कर्मियों की एक आम ग्रामीण के लिए क्या जवाबदेही है।खैर यह तो फिल्मों की बात है असल जिंदगी में यह एकदम जुदा है यानि रील लाइफ और रियल लाइफ दोनों उलट हैं।
ग्राम पंचायत छाता के सचिव का ऊपरी जिम्मेदारों से पता नही क्या सांठगांठ है कि निर्माण कार्य का बिना मूल्यांकन के ही  आहरण कैसे हो जाता है।बचपन मे एक खेल खूब खेला जाता था ‘मिले-मिले साँथी अकेला बचा चोर’….
इस पूरे खयानत में सचिव और जनपद के जितने भी जिम्मेदार शामिल हों लेकिन पूरे पिक्चर का स्क्रिप्ट अभी भी सचिव के द्वारा लिखा जा रहा है यानि किसी भी पंचायत का ‘हॉर्स पावर’ या ‘वित्तीय शक्ति’ सचिव के हाँथ में ही होता है और सामुदायिक स्वच्छता परिसर के बाद अब सोखता का पैसा भी सचिव द्वारा आहरण कर लिया गया है। एक और फरियादी ने बताया की उसका भी पैसा इसी तरह सचिव द्वारा हजम कर लिया गया है मांगने में तारीखों का सिलसिला मिलता है भुगतान नही।

यह है पूरा मामला….

फरियादी ने बताया कि 21 सितंबर 2022 से उसने जनपद सोहागपुर अंर्तगत छाता पंचायत में सचिव द्वारा सामुदायिक स्वच्छता परिसर में काम कराकर उसका राशि जिम्मेदारो के साँथ मिलकर आहरण कर लिया गया है और उसकी लागत और मजदूरों का भुगतान नही किया जा रहा है।
उक्त सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण धनपुरा मार्ग में उप स्वास्थ्य केंद्र के पास छाता में निर्मित है।
पंचायत और जनपद में वेंडर के नाम से बिल देने लेने का अपना एक अलग चलन है उसके साँथ भी यही हुआ चूंकि वह वेंडर नही था जिस कारण वेंडर के साँथ मिलकर सचिव द्वारा हेरफेर कर लिया गया और अब भुगतान के बदले लटकाने का काम किया जा रहा है।
एक अन्य फरियादी के साँथ भी फ्राडगिरी…
इस मामले में समाचार प्रकाशित करने के बाद सचिव की शिकायत की कतार और बढ़ गई और एक अन्य फरियादी ने बताया कि उसके साँथ भी ऐसा ही हुआ है उसने पंचायत में सोकपिट बनाया था किंतु उसका भुगतान नही हो रहा है माँगे जाने पर न नुकुर करके माँमला ताल दिया जाता है और पंचायत ऐप में देखने पर ज्ञात हुआ कि उक्त निर्माण कार्य का भुगतान हो चुका है जबकि निर्माण कार्य करने वाले को उक्त राशि अभी तक नही मिली।

बिना मूल्यांकन कैसे हुआ आहरण…

फरियादी ने बताया कि
आज तक मेरे काम का मूल्यांकन नही हुआ है 49500 सिर्फ दिया गया था शेष राशि बाँकी है, फरियादी द्वारा फोन लगाने पर सचिव बोलता है अभी पैसा नहीं आया है जब की उस पैसा का गबन कर लिया गया है फरियादी का कहना है उसका 1,50000 लाख से अधिक की पूजी उसमे लगी है और उसके द्वारा सचिव से अपना लागत मांगने पर सचिव उसे बरगला रहे हैं।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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