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सीवर लाइन में मृत मजदूरों के जिम्मेदारों पर पाँच के खिलाफ मामला दर्ज, बाँकियो पर कब..?

सीवर लाइन में समय बेकसूर मजदूरों की मौत के मामले में पुलिस ने अभी तक पांच लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 106 के तहत मामला दर्ज कर लिया।

कांग्रेस पूर्व जिला अध्यक्ष आजाद बहादुर सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रोजेक्ट की लापरवाही के कारण ही दो अकुशल मजदूरों की जान चली गई, और उन बैगा आदिवासी परिवार से उन मजदूरों का साया छिन गया जिस परिवार के वे मुखिया थे।
यह लापरवाही प्रोजेक्ट एमपीयूडीसी की वजह से ही हुआ प्रतीत होता है क्योंकि उन भोले भाले बैगा आदिवासी मजदूर मुकेश एवं महिपाल बैगा को जोखिम भरे गड्ढे में जो लगभग 15 से 20 फीट गहरा था। बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उतारा गया यह प्रोजेक्ट एवं प्रोजेक्ट मैनेजर विजय सिंह की घोर लापरवाही निरूपित करता है। सिर्फ प्रोजेक्ट के सब इंजीनियर जितेंद्र यादव की लापरवाही नहीं यदि जितेंद्र यादव की लापरवाही है और उस पर मुकदमा कायम होता है तो प्रोजेक्ट मैनेजर की लापरवाही निरूपित होती है उस पर भी कार्रवाई होना चाहिए। उसके ऊपर भी धारा 106 के तहत मुकदमा कायम होना चाहिए, परंतु उसे क्यों बचाया जा रहा है यह एक प्रश्न चिन्ह?
जैसा की जानकारी है कि प्रोजेक्ट मैनेजर विजय सिंह ने घटना के पूर्व 15 तारीख को इंस्पेक्शन में लिखा कि कार्य जोखिम भरा है, यह घटना होने के बाद लिखा प्रतीत होता है। यदि कार्य जोखिम भरा था तो वह प्रोजेक्ट के मैनेजर थे। इस काम को रोक सकते थे। यह उनकी जवाबदेही है। लेकिन भारी बरसात में काम जारी था और तो और प्रोजेक्ट मैनेजर के आदेश के बिना काम जारी नहीं रह सकता उसे बंद नहीं कराया जा सकता था। लेकिन कार्य चालू था और तो और बारिश में उन भोले वाले मजदूरों को जो पहले दिन ही कार्य पर आए थे या उन्हें लाया गया था। उन्हें बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जोखिम भरे गड्ढे में काम करने के लिए उतारा गया। लापरवाही इतनी ही भर नहीं है क्योंकि बारिश में सकरी जगह पर कार्य चल रहा था तो गड्ढे के ऊपर जो मिट्टी रखी गई थी वह वहां नहीं रखा जाना चाहिए था। उसे अन्यत्र ले जाकर रखा जाना चाहिए था। लेकिन विभाग के लोगों ने कंस्ट्रक्शन कंपनी का आर्थिक नुकसान ना हो, क्योंकि अन्यत्र रखने में ट्रांसपोर्टिंग करनी पड़ती और फिर जब गड्ढा भरा जाना होता तो उसे फिर ट्रांसपोर्टिंग करके लाया जाता जिससे कंपनी को आर्थिक क्षति पहुंचती। कंस्ट्रक्शन कंपनी को आर्थिक क्षति न पहुंचे भले उसमें भोले भाले अप्रशिक्षित मजदूरों की जान भले चली जाए और यह हुआ भी 17 जुलाई को क्योंकि मिट्टी गड्ढे के बगल में 15- 20 फीट गड्ढे की मिट्टी बगल में रखी जाएगी तो वह एक पहाड़ के ढेर जैसा हो जाएगा पानी बरस रहा था। वह मिट्टी का ढेर धसकने लगा जिस कारण मजदूर दबने लगे दबने के कारण मजदूरों ने आवाज़ लगाई चिल्लाया कि मुझे बचा लो, यह वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने जो कोनी के रहवासी हैं। सब ने बताया उन्होंने यह भी बताया कि उनकी आवाज सुनकर हम सब ने भी वहां मौजूद विभाग के लोग व कर्मचारियों से गुहार लगाई कि उन्हें बचाओ। लेकिन बचाने की बजाय वे सब भाग खड़े हुए।
लापरवाही के कारण दो मजदूरों की तो जान चली गई लेकिन अभी भी मेसर्स पी.एस. स्नेहल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड अहमदाबाद द्वारा पूरे शहर में जो सीवरेज लाइन के नाम पर गड्ढा खोदकर छोड़ रखा गया है उसमें कई लोगों की जाने जा सकती हैं इसलिए लापरवाह प्रबंधक के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए ताकि कारण अकस्मात किसी और की जीवन लीला सीवरेज लाइन के चलते समाप्त न हो।
लगभग 3 घंटे बाद जब जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन वहां पहुंचा तब एसडीआरएफ ने राहत बचाव कार्य चालू किया तब तक बैगा आदिवासी मजदूर की मौत हो चुकी थी।
इस कारण ही यह लापरवाही परिलक्षित होती है कार्य जो चल रहा था वह किसकी अनुमति से चल रहा था? यह कार्य स्नेहल कंस्ट्रक्शन कंपनी एवं जिस विभाग के साथ उसका करार था व जिस विभाग ने इसकी अनुमति प्रदान की थी कार्य करने की उन सभी विभाग के प्रमुखों का भी दोष परिलक्षित होता है। अतः उन सभी पर दंडात्मक कार्यवाही होनी चाहिए। यह संवेदनशीलता के आधार पर उस परिवार को न्याय देने के लिए होना चाहिए यह सब की मांग है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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