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मप्र भाजपा में गुटबाजी, नए सीएम की माँग.. विरोध के सुर मुखर

 

डेस्क…मप्र

विनय मिश्रा की कलम से…

सत्ता में कब कौन किसे धोखा दे जाए, कौन कब मात खा जाए इस पर गहन मंथन करने वाले भी आज तक मंथन नही कर पाए और मंथन हुआ भी तो न तो विष निकला न अमृत । तात्पर्य ऊपर लिखी लाईनों में हमने डिस्क्राइब कर दिया है ।
राजा कौन नही बनना चाहता, कुर्सी कौन छोड़ना चाहता है पर जब बात संगठन के ताकत और खुद पर लगे बदनामी के दाग हों तो फिर कहीं न कहीं संगठन की बातों को न चाहकर भी तरजीह देना पड़ता है।
मप्र विधानसभा चुनाव में अकेले विजयी फैक्टर शिवराज सिंह चौहान और उनकी लाडली बहन योजना थी जो न सिर्फ माताओं बहनों को भाजपा को वोट देने के लिए विवश कर दिया बल्कि पुरुष वर्ग का बड़ा तबका भी पत्नी और बहन को लाभान्वित होते देख भाजपा पर बटन दबा दिए परिणाम अप्रत्याशित आया, ,जिसकी उम्मीद पूरे भाजपा खेमे ने नही की थी किन्तु चुनाव के दरमियान प्रधानमंत्री मोदी और शिवराज दोनों की छवि पर चर्चाएँ शुरू हो गई थी यहाँ तक की कयास लगाया जा रहा था कि मामा विधानसभा चुनाव के बाद केंद्र में मोदीजी के अगले वारिश होंगे किन्तु सत्ता में बैठे चंद मठाधीशों को यह नागँवार गुजरा और पीएम की कुर्सी तो दूर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के लिए ऐसी बिसात बिछाई गई कि शिवराज सिंह सत्ता की चाह रखते हुए भी कुछ न कर पाए। मुख्यमंत्री के इस दौड़ में मप्र के दिग्गज राजनेताओं के समीकरण भी फेल हुए और सह और मात के इस खेल में हमेशा सत्ता में अप्रत्यक्ष दखल रखने वाले आरएसएस ने सभी सोंच पर पूर्ण विराम लगा दिया और अंत मे निकला मोहन जी का नाम जो “बुझे हुए बल्ब की तरह अचानक जल गए” ऐसा हम नही कहते यह एक प्रतिष्ठित टीवी चैनल में उन्होंने अपने इंटरव्यू के दौरान कहा पर ये बात सत्ता में बैठे पुराने लोगो को रास नही आई और वो अभी भी मुख्यमंत्री मोहन यादव का दबे सुर विरोध कर रहे हैं..

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा के नेताओं के बीच गुटबाजी बढ़ती जा रही है। इस गुटबाजी का हिस्सा डिप्टी सीएम से लेकर मंत्री तक है। इसकी बानगी हाल ही के दिनों में तब खुलकर सामने आ गई, जब प्रदेश में नए सीएम की मांग की गई।
एमपी में भाजपा के नेताओं के बीच गुटबाजी बढ़ती जा रही है। इस गुटबाजी का हिस्सा डिप्टी सीएम से लेकर मंत्री तक है। इसकी बानगी हाल ही के दिनों में तब खुलकर सामने आ गई, जब मुरैना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम बनाने के बैनर लगे। तो रीवा में सीएम के स्वागत में लगे पोस्टरों से डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल की फोटो गायब हो गई। इन मामलों से समझिए भाजपा में गुटबाजी…।

मुरैना में माँग ज्योतिरादित्य बनें सीएम..?

बीते दिनों मुरैना में केंद्रीय मंत्री सिंघिया लंबे समय के बाद दौरे पर पहुंचे। तब वहां एक पोस्टर सुर्खियां पर रहा। इसमें सिंधिया को सीएम बनाने की मांग हो रही थी। जो सोशल मीडिया में भी खूब वायरल हुआ। वायरल हुए पोस्टर में लिखा था कि सिंधिया को सीएम बनाओ, नहीं तो अपनी खैर बचाओ। इस पोस्टर के चर्चे पार्टी मुख्यालय तक हैं। जानकारी के मुताबिक पार्टी के अन्य प्रतिस्पर्धी नेताओं ने इसकी शिकायत भी की है।

रीवा में जब पोस्टर से गायब हो गया डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला की तस्वीर…

रीवा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी की जन्म शताब्दी कार्यक्रम में पोते व त्योंथर से विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने शुक्रवार को कार्यक्रम किया। इसमें सीएम ने शिरकत की। सीएम के स्वागत में सिद्धार्थ समर्थकों ने शहर को पोस्टरों से पाट दिया। लेकिन इसमें डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल को जगह नहीं दी। नाराज शुक्ला कार्यक्रम में ही नहीं पहुंचे।

यही हाल मप्र के देवास में…

विधायक का पोस्टर उतारने पर विवाद
देवास में पोस्टर लगाने नहीं बल्कि उतारने को लेकर विवाद हो गया। नवरात्रि पर्व से पहले भाजपा विधायक गायत्री राजे पवार के पोस्टर शहर में लगे। लेकिन नगर निगम ने होर्डिंग्स व पोस्टर उतार दिए। विधायक पुत्र विक्रम राव समर्थकों के साथ सड़क पर उतर गए। उन्होंने निगम कमिश्नर के खिलाफ मोर्चा खोला। इतना  ही नही धमकी तक दे डाले l।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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