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धन्य-धन्य है धनपुरी!

 

रिश्वत खोरी और लूट का मंजर लगातार जारी
अफसर खुली आँख से देखते हुए भी मूकदर्शक

पीएम आवास के बदले ली जा रही रिश्वत — गरीबों के हक़ पर हाथ डाल रहे बिचौलिए

शहडोल।। विनय मिश्रा…

 

धन्य-धन्य हो! धनपुरी ये गाना लारी में बजकर अच्छा सन्देश देता तो है पर शायद आम जनता को सुनाने मात्र के लिए। इसका हकीकत से कोई सरोकार नही, और हैं भी तो इसी स्लोगन को उल्टा और अचंभित करके भी देख लेते हैं, धन्य-धन्य हो 
जहाँ प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने वाले गरीब-मजलूम लाभार्थियों से भी पैसे की माँग की जाती है गिनती से पैसे आते हैं नीव,दीवार और छत के लिए उसमें भी बाबूगिरी और अफसरशाही की बानगी है जहाँ नोटों की गड्डी टेबल के नीचे से लेकर प्रथम पंक्ति के अफसरों तक पहुँचती है तब एक गरीब का छत ढलता है, कितना अच्छा है धनपुरी नगरपालिका!
देश के प्रधानमंत्री 4करोड़ प्लस लोगो को आवास बाँट रहे हैं और आवास की प्रक्रिया पूर्ण करने वाले लोग रिश्वत माँग रहे हैं।
सच कहें सरकार की अपनी जवाबदेही इस भर्रेशाही के पीछे इतनी उदासीन है जिसकी कोई सीमा नही है अब तो ‘सनातन’ के इस युग में ऐसा चल रहा है “राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट”मतलब आप सब समझते हैं आगे की लाइन क्या कहती है।

धनपुरी।
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीबों को पक्की छत देना है, लेकिन धनपुरी क्षेत्र में यह योजना भ्रष्टाचार की जकड़ में फँस गई है। आरोप है कि पात्र हितग्राहियों से आवास स्वीकृति और किस्त जारी करने के नाम पर खुलेआम रिश्वत की मांग की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर कुछ कर्मचारी और बिचौलिए मिलकर पाँच से दस हज़ार रुपए तक की वसूली कर रहे हैं। जो व्यक्ति पैसे नहीं दे पाता, उसका नाम सूची से गायब कर दिया जाता है या फिर किस्त रोक दी जाती है।
“न दो तो नाम काट दो” — यह बन गया है नया नियम

आवेदकों का कहना है कि बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाती जब तक “सेवा शुल्क” न दिया जाए। कई परिवार वर्षों से प्रतीक्षा सूची में हैं, जबकि कुछ लोगों को भुगतान के बाद तुरन्त स्वीकृति मिल गई।

शिकायतें बेअसर — अधिकारियों पर सवाल

लोगों ने बताया कि जनपद और नगर पालिका और ग्रामीण क्षेत्रो में आवास योजना की मॉनिटरिंग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की शिकायत तो की जाती है पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती मजबूरन लोकायुक्त विभाग जैसे अफसरों को बुलाकर इनके हाँथ रंगे जाते हैं।

“सरकार तो गरीबों को घर दे रही है, पर अफसर और दलाल उसकी नींव में रिश्वत का कीड़ा लगा रहे हैं।”
धनपुरी नगर पालिका परिषद में लोकायुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सहायक राजस्व निरीक्षक को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है।
आरोप है कि अधिकारी ने एक आम नागरिक से मकान निर्माण की अनुमति के बदले में पांच हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी।”

“मामला शहडोल जिले के धनपुरी नगर पालिका का है…
जहाँ सहायक राजस्व निरीक्षक इंद्र बहादुर सिंह ने शिकायतकर्ता योगेन्द्र मेहरा से ₹5000 रिश्वत मांगी थी।
शिकायतकर्ता के पिता सिद्दीकी कॉलोनी में मकान निर्माण करवा रहे थे, जिसे अधिकारी ने रोक दिया था।
निर्माण फिर से शुरू करने की अनुमति देने के नाम पर मांगी गई थी रिश्वत…”

“शिकायत लोकायुक्त रीवा कार्यालय में 9 अक्टूबर को दर्ज कराई गई थी।
पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार पाटीदार के निर्देशन में शिकायत की जांच की गई…
और जब सत्यापन के दौरान अधिकारी ने 3000 रुपए की मांग दोहराई —
तो 13 अक्टूबर को टीम ने ट्रैप प्लान किया।”

“लोकायुक्त की टीम ने आरोपी इंद्र बहादुर सिंह को नगर पालिका कार्यालय में उसके ही कक्ष से 3000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
कार्रवाई का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार ने किया,टीम में निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया, प्र.आर. सुरेश कुमार, मुकेश मिश्रा, पवन पाण्डेय, शाहिद खान और शिवेंद्र मिश्रा शामिल रहे।”

यह पूरी कार्रवाई पुलिस महानिदेशक (लोकायुक्त) श्री योगेश देशमुख के निर्देश पर की गई।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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