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ठंड चरम पर, पर अलाव नदारद – शहर सिहर रहा ठंडी से

ठंड चरम पर, पर अलाव नदारद – शहर सिहर रहा ठंडी से

शहडोल।।

जब भी सर्दी शुरू होती है पता नही है क्यों मुंशी प्रेमचंद जी की लिखित कहानी “पूस की रात” की कहानी और जबरा कुत्ते की याद आ ही जाती है कड़ाके की ठंड और सर्दी में सिहरते शहर के लोग या तो घरों की ओर भागते हैं या फिर चौराहों-तिराहों में जलने वाले अलाव को।
शहडोल जिले में नही बल्कि इन दिनों पूरे मप्र में ठंडी अपने शबाब पर है।
कड़ाके की ठंड ने दस्तक दे दी है। सुबह की धुंध, रात की चुभन और हवा में सिहरन साफ महसूस की जा सकती है, पर अफ़सोस—नगर में अलाव व्यवस्था पूरी तरह ठप है। जहाँ हर साल चौराहों, बस स्टैंडों और बाजारों में अलाव जलाए जाते थे, इस बार शहर ठंड से काँप रहा है और अलाव गायब, मानो किसी ने सर्दी से करार कर रखा हो।

रात को काम से लौटते मजदूर, ऑटो -रिक्शा चालक और राहगीर ठंडी सड़क पर कांपते दिखते हैं, पर गर्माहट का कोई प्रबंध नहीं। बस स्टैंड पर यात्रियों की सांस धुएँ की तरह जम रही है, चौराहों पर लोग हाथ रगड़ते हैं, पर अलाव का धुआँ नहीं—सिर्फ़ इंतज़ार दिखाई देता है।

नगर पालिका और नगर परिषद द्वारा अभी तक इस भारी ठंड में लकड़ियों की व्यवस्था नही की गई है कई प्रमुख स्थानों पर अब तक एक भी अलाव नहीं जला, न कोई सुरक्षा व्यवस्था, न कोई राहत। गरीबों, बुजुर्गों और बेघर लोगों के लिए यह सिर्फ़ राहत नहीं, जीवन का सवाल है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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