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रिकार्ड तोड़ ठंडी में अभी तक बच्चों का बैग नही छूटा..

मध्यप्रदेश में भीषण सर्दी के साथ घना कोहरा भी छा रहा है। इसके चलते न सिर्फ मानव जीवन प्रभावित हो रहा है बल्कि फ्लाइट और ट्रेनें भी डिले चल रही है।शनिवार को शहडोल के कल्याणपुर में पारा रिकॉर्ड 2.8 डिग्री पर पहुंच गया। एमपी में इस सीजन पहली बार पारा इतना नीचे पहुंचा है।

 

मौसम विभाग के मुताबिक, रविवार सुबह ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, उमरिया और कटनी में कोहरे का असर है। भोपाल, शाजापुर, देवास, सीहोर, रायसेन, विदिशा में मध्यम कोहरा है। यहां विजिबिलिटी 2 से 4 किलोमीटर तक है।

शहडोल।।

जिले में कड़ाके की ठंड के बावजूद शिक्षा विभाग की संवेदनहीनता सामने आ रही है। अनूपपुर कलेक्टर ने संवेदना दिखाते हुए प्राईमरी कक्षाओं के बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान रखते हुए छुट्टियाँ घोषित कर दिए हैं तो शहडोल जिले से बच्चों के हित मे अभी तक किसी प्रकार की खबर देखने को नही मिली। मौसम विभाग ने शहडोल जिले को मप्र का सबसे ठंडा शहर घोषित किया है वहीं बच्चो को इस ठंड में बस्ता लेकर सुबह स्कूल का दौड़ लगाना पड़ रहा है। शीतलहर और गिरते तापमान के बीच प्राथमिक कक्षाएँ अब भी नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं, जिससे नन्हे बच्चों की सेहत पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

सुबह-सुबह ठिठुरन भरी ठंड में 5 से 10 वर्ष तक के मासूम बच्चों को स्कूल आने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कई स्कूलों में न तो पर्याप्त गर्म व्यवस्था है और न ही बच्चों के लिए कोई विशेष सावधानी बरती जा रही है।

अभिभावकों का कहना है कि ठंड के कारण बच्चों को सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत हो रही है, फिर भी न तो स्कूलों के समय में बदलाव किया गया और न ही अवकाश की कोई घोषणा। सवाल यह है कि जब ठंड से बचाव के लिए प्रशासन अन्य विभागों में निर्देश जारी कर सकता है, तो नन्हे बच्चों के मामले में यह लापरवाही क्यों?
शिक्षा विभाग को इस पर विचार करना चाहिए।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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