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6 हजार सागौन के पेड़ों की बलि पर कोल माइंस!

6 हजार सागौन के पेड़ों की बलि पर कोल माइंस! गोपालपुर में ‘विकास’ के नाम पर हरियाली का सफाया
शहडोल।
विनय मिश्रा की रिपोर्ट..

गोपालपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र में प्रस्तावित बिरला कोल माइंस परियोजना ने शुरू होने से पहले ही विनाश की आहट दे दी है। करीब 120 हेक्टेयर जमीन पर फैलने वाली इस खनन परियोजना के लिए हजारों सागौन के पेड़ों पर आरी चलने की आहट ने बता दिया है आगामी दिनों में आसपास के गाँव व वहाँ के रहवासियों के स्वाथ्य और उनके आसपास के वातावरण का क्या होगा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगभग 6 हजार बहुमूल्य सागौन वृक्षों की कटाई कर कॉरपोरेट मुनाफे की राह साफ की जा रही है।

 

इस मामले में खबर लिखने से पहले जब हमने क्षेत्र के लोगों और अपने ईष्ट जनों से चर्चा किया तो उन्होंने कहा की जिन पेड़ों को बड़ा होने में दशकों लगते हैं, उन्हें कुछ दिनों में मिटाया जा रहा है। ये सिर्फ पेड़ नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन से जुड़ी पूरी जीवन-व्यवस्था पर चोट है। सागौन के घने जंगलों के खत्म होने से वन्यजीवों का बसेरा उजड़ेगा, भूजल स्तर गिरेगा और इलाके का तापमान व प्रदूषण दोनों बढ़ेंगे।
शहडोल सम्भाग आदिवासी बाहुल्य है और जिस स्थान पर कोल माइंस की इबारत रची जा रही है वहाँ सैकड़ो आदिवासी किसान आज सैकड़ो वर्षों से निवासरत हैं आपको बता दें की अहिरगवा और मौहार टोला में बसने वाले सैकड़ो आदिवासियों के जीवन और उनके स्वाथ्य पर गहरा संकट मंडराएगा इस बात से इंकार नही किया जा सकता।
स्थानीय किसान और आदिवासी समुदाय खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनका आरोप है कि विकास के नाम पर उनकी प्राकृतिक पूंजी छीनी जा रही है, जबकि बदले में उन्हें सिर्फ धूल, शोर और बीमारियाँ मिलेंगी। लोगों का कहना है कि खनन शुरू होते ही खेतों पर कोयले की धूल जमेगी, पानी के स्रोत दूषित होंगे और रोजमर्रा का जीवन जहरीली हवा में घुटेगा।
पर्यावरण सम्बंधित लेखों की माने इतनी बड़ी संख्या में सागौन कटने का नुकसान कुछ औपचारिक पौधारोपण से पूरा नहीं हो सकता दशकों में तैयार हुए प्राकृतिक वन की जगह कृत्रिम हरियाली कभी नहीं ले सकती। इसके बावजूद अगर परियोजना को बिना कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के आगे बढ़ाया गया तो यह आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा।
अब सवाल सीधा है: क्या कुछ साल के आर्थिक लाभ के लिए सदियों की हरियाली कुर्बान कर दी जाए?

प्रभावित गाँव और क्षेत्र..

माइंस खुलने
से गोपालपुर,करकटी,सरईकापा चिटुहला,बरतरा, धनपुरा, विक्रमपुर और इनसे सटे दर्जनों मुहल्ले धूल-डस्ट और खदान की ब्लास्टिंग की धमक झेलेंगे।इस मामले पर ग्रामीणों ने कहा कि पूरी पारदर्शिता के साथ पर्यावरणीय आकलन सार्वजनिक किया जाए और स्थानीय जनता की सहमति के बिना एक भी कदम आगे न बढ़ाया जाए। यहाँ ‘विकास’ और ‘विनाश’ के बीच की रेखा खतरनाक रूप से धुंधली होती जा रही है।

फिलहाल पेड़ो का सरकारी दर क्या है,किस मापदंड में काटे जा रहे हैं और इनका पुनः प्लांटेशन होगा इसकी जानकारी नही लग पाई है और होगा भी की नही कुछ कहा नही जा सकता।

इनका कहना है..

मैं कुछ नही जनता आप ऊपर से पता कर लीजिए, एस कुमार टांडिया, बीटगार्ड बुढ़ार वन परिक्षेत्र 

आप टेस्ट मैसेज कर दीजिए,सलीम खान वन परिक्षेत्र अधिकारी बुढ़ार

 

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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