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मुख्यमंत्री कार्यक्रम में कांग्रेस का दोहरा चेहरा और प्रशासन की “लाठी”

मुख्यमंत्री कार्यक्रम में कांग्रेस का दोहरा चेहरा, संगठन पर उठे सवाल”

शहडोल।

बीते दिनों मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में 8 फरवरी को हुई एक घटना और एक समाचार प्रकाशन ने काँग्रेस कार्यकताओं व समूचे कांग्रेसियो की निष्ठा और उनकी कर्तव्यपरायणता पर सवाल खड़ा कर दिया समाचार का विषय और लाइनें थी कि क्या सिर्फ चंद कार्यकर्ता ही काँग्रेस में बचे हैं जो लाठी खा रहे हैं या फिर जिलाध्यक्ष का एक खेमा जो मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के आने से पूर्व ही फोटोबाजी और प्रदर्शन कर जिला मुख्यालय चले गए और गिरप्तारी के बाद देर शाम उनकी रिहाई हो गई इन सबके बीच बहस का मुद्दा और कानून प्रशासन के लिए भी सवाल हैं कि क्या लोकतांत्रिक प्रणाली में लोकतंत्र का कोई मूल्य नही क्या विपक्ष अपने मुख्यमंत्री को काला झंडा नही दिखा सकता क्या झंडा दिखाना इतना बड़ा अपराध है कि एक नाबालिग छात्र को 24 घण्टे से ऊपर जेल में रखा जाए और वह परीक्षा से वंचित हो जाए क्या उसके भविष्य की चिंता जिला प्रशासन को कतई नही थी फिर फरवरी माह में शुरू होने वाले परीक्षा की निगरानी और समीक्षा जिला कलेक्टर किस मुह से सोशल मीडिया में कर रहे थे?
राजनीति छात्र जीवन से शुरू होता है और इस बात को जिला कलेक्टर गहराइयों से समझना चाहिए और उस छात्र को समझाइश देकर भी छोड़ा जा सकता था उसने ऐसा कोई जघन्य अपराध तो नही किया था जिसकी रिहाई 24 घण्टे न हो और उसे परीक्षा केंद्र में दबे पाँव स्थानीय पुलिस द्वारा छोड़ा जाए।
खैर एक बार पुनः काँग्रेस के फड़ का जिक्र कर लेते हैं जब मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में वरिष्ठ कांग्रेसी व नगरपालिका उपाध्यक्ष अपनी मौजूदगी दिखा रहे थे तो अध्यक्ष पद के दावेदार मुख्यमंत्री की शोभा में फूल बरसा रहे थे इन सबके बीच ब्लाक का एक ऐसा युवा नेता जिसे हाल ही में अभी अध्यक्ष बनाया है वो कलेक्टर की लाठी का साहस से सामना कर रहा था और उसने वहां से पलायन तक नही की एक तरफ ब्लाक अध्यक्ष की पूरी सेना झंडे दिखाकर डंडे खा रहे थे तो दूसरी ओर जिलाध्यक्ष के निर्देशन में कुछ कांग्रेसी रची रचाई स्क्रिप्ट पर फिल्म बनाकर चले गए जो रील के रूप में सोशल मीडिया पर खूब चला।
अब जिलाध्यक्ष से सवाल है कि क्या उनकी रिहाई इतना जरूरी था जितना कि जेल में बंद वो नवयुवक जो अपनी पार्टी के लिए समर्पित होकर अपना भविष्य दाव पर लगा दिए खैर जिलाध्यक्ष ने अपने इस पूरे पटकथा का अंत कलेक्टर शहडोल के कार्यालय के सामने धरना देकर खत्म कर दिया और एक बिखरी हुई कांग्रेस की सहानभूति भी उन्हें मिल गई।
समाचार प्रकाशन के बाद कुछ कांग्रेसियो की दलीलें सामने आई कि उन्हें प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम की सूचना नही थी इस बात में कितनी सच्चाई है ये हम नही जानते पार्टी के अंदरूनी खाने में क्या चल रहा है ये भी हम नही जानते पर पार्टी के बाहर की खाई और बिखराव रोड और प्रदर्शन पर साफ दिखा जहाँ समूचे कोयलांचल में हर मुहल्ले में पार्षदी का टिकट माँगकर चुनाव लड़ने वाले कांग्रेसियो में से कुछ ही चेहरे दिखे। ये मेरा अपना मत नही है पर सवाल तो बनता है कि इतने बड़े कार्यक्रम का शोर पूरे जिले में था पर कोयलांचल में मौजूद कांग्रेसियो को नही सुनाई दी

 

वहीं दूसरी ओर इन्ही कांग्रेसियो के खास चेहरे मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में मंचासीन रहे मजाक में ही सही पर कोयलांचल में समूचे कांग्रेसियो संगठन द्वारा  घर-घर जाकर कार्ड देना चाहिए या फिर नगरपालिका धनपुरी जैसे मुख्यमंत्री के कार्यक्रम नाम की गली-गली डिक्री पिटवानी चाहिए जिस नगरपालिका धनपुरी में इतने बड़े कार्यक्रम का आयोजन हुआ और कांग्रेसियो का परिहास, दरअसल इस नगरपालिका में कांग्रेस की लंका इसी हनुमान और शोभा जैसे लोगों ने लगाई थी नही क्या मजाल की 13 सीट और पूर्ण बहुमत लाने के बाद काँग्रेस नगरपालिका में काबिज न हो सकी।
समीक्षा बहुत है पर कहते हैं न- ये जो पब्लिक है सब जानती है ये जो पब्लिक है…

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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