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‘पाखंडी पाकिस्तान’ पर भारत का हमला: UN में एयरस्ट्राइक को लेकर कड़ी फटकार

अफगानिस्तान पर हमलों को लेकर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा करते हुए अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों की तीखी आलोचना की है। भारत ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और किसी भी देश की संप्रभुता के सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन बताया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई बैठक के दौरान भारत के स्थायी मिशन के प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तान के हालिया एयरस्ट्राइक को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन हमलों से बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की मौत हुई है और हजारों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है, और इसका उल्लंघन वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।


‘पाखंड’ पर भारत का तीखा प्रहार

यूएन में अपने संबोधन के दौरान हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तान पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ वह अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामिक एकता की बात करता है, जबकि दूसरी ओर रमजान के पवित्र महीने में अफगानिस्तान पर हमले करता है।

उन्होंने इसे “खुला पाखंड” करार दिया।

पर्वतनेनी ने कहा कि रमजान जैसे पवित्र समय में सैन्य कार्रवाई करना न केवल मानवीय मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि यह उन सिद्धांतों का भी मजाक उड़ाता है जिनका हवाला पाकिस्तान अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देता रहा है।


नागरिकों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इन हमलों का सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को झेलना पड़ा है।

6 मार्च 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कम से कम 185 निर्दोष लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।

इसके अलावा एक लाख से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं।

भारत ने कहा कि इस तरह की सैन्य कार्रवाइयों से पहले से ही संकट झेल रहे अफगानिस्तान की मानवीय स्थिति और भी खराब हो रही है।


व्यापार और पारगमन पर भी जताई चिंता

भारत ने केवल सैन्य कार्रवाई ही नहीं बल्कि पाकिस्तान द्वारा लगाए गए व्यापार और पारगमन प्रतिबंधों पर भी चिंता जताई।

अफगानिस्तान एक भू-आवेष्ठित (Landlocked) देश है, यानी उसकी समुद्र तक सीधी पहुंच नहीं है। ऐसे में पड़ोसी देशों के रास्ते व्यापार और परिवहन उसके लिए बेहद जरूरी हैं।

भारत ने कहा कि किसी देश को व्यापारिक मार्गों से वंचित करना एक तरह का आर्थिक दबाव है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ है।


‘ट्रेड और ट्रांजिट टेररिज्म’ पर भारत की चेतावनी

यूएन में भारत ने “ट्रेड और ट्रांजिट टेररिज्म” शब्द का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान की नीति की आलोचना की।

भारत ने कहा कि जब कोई देश जानबूझकर दूसरे देश के व्यापार मार्गों को बाधित करता है या उसकी पहुंच को सीमित करता है, तो यह वैश्विक व्यापार प्रणाली के लिए खतरनाक है।

ऐसी कार्रवाइयां न केवल विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के खिलाफ हैं बल्कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन हैं।


अफगानिस्तान की स्थिति पर बढ़ती चिंता

अफगानिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और मानवीय समस्याओं से जूझ रहा है।

तालिबान शासन के बाद से देश में आर्थिक गतिविधियां कमजोर पड़ी हैं और बड़ी संख्या में लोग गरीबी और बेरोजगारी से प्रभावित हैं।

ऐसे समय में सैन्य हमले और व्यापारिक प्रतिबंध वहां के हालात को और अधिक गंभीर बना सकते हैं।

भारत ने इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह अफगानिस्तान की जनता की मदद के लिए आगे आए।


अमेरिका का भी आया बयान

इस बीच अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी अफगानिस्तान की स्थिति पर बयान जारी किया।

उन्होंने कहा कि तालिबान अब भी आतंकवादी तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है और लोगों को फिरौती के लिए अगवा करने जैसी गतिविधियां जारी हैं।

रुबियो ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को खत्म करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा हैं।


क्षेत्रीय स्थिरता पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता तनाव पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर व्यापार, सुरक्षा और मानवीय स्थिति पर पड़ सकता है।


भारत का स्पष्ट संदेश

यूएन में भारत का रुख साफ रहा कि किसी भी देश को दूसरे देश की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए।

भारत ने यह भी दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए, न कि सैन्य कार्रवाई के जरिए।


निष्कर्ष

संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह बयान एक मजबूत कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।

इसमें पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई की आलोचना के साथ-साथ अफगानिस्तान की मानवीय स्थिति और व्यापारिक चुनौतियों पर भी ध्यान आकर्षित किया गया है।

भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवीय मूल्यों का सम्मान ही क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की आधारशिला है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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