ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इससे जेट ईंधन महंगा हो रहा है, जिससे एयरलाइनों की लागत बढ़ गई है। नतीजा यह है कि टिकट की कीमतें बढ़ रही हैं और कुछ एयरलाइंस विमानों को ग्राउंड करने की तैयारी कर रही हैं।

एशियाई एयरलाइंस सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, क्योंकि उनके पास ईंधन के कीमतों से बचाव के मजबूत कार्यक्रम कम हैं।

तेल कीमतों में भारी उछाल

संघर्ष शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 15% से ज्यादा बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड एक समय 29% तक उछला। कुछ बाजारों में जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। यह 1970 के दशक के बाद सबसे बड़ा तेल संकट जैसा दिख रहा है।

रॉयटर्स के अनुसार, हालिया दिनों में कीमतें 100 डॉलर से ऊपर बनी हुई हैं, हालांकि कुछ उतार-चढ़ाव देखा गया है।

एशियाई एयरलाइंस पर सबसे ज्यादा असर

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि एशिया की एयरलाइंस खासतौर पर जोखिम में हैं। स्पार्टा कमोडिटीज की वरिष्ठ विश्लेषक जून गोह ने ब्लूमबर्ग को बताया कि घबराहट फैल गई है। जिन एयरलाइंस के हेजिंग प्रोग्राम कमजोर हैं, वे जेट ईंधन की मौजूदा ऊंची कीमतों से बहुत प्रभावित हैं, खासकर जब उन्होंने पुरानी कम कीमतों पर टिकट बेचे थे।

दक्षिण-पूर्व एशिया की कुछ लो-कॉस्ट एयरलाइंस अब विमान ग्राउंड करने की योजना बना रही हैं, अगर ईंधन बहुत महंगा या उपलब्ध न हो।

भारतीय और अन्य एयरलाइंस ने बढ़ाए किराए

भारतीय एयरलाइंस ने लंबी दूरी की उड़ानों पर टिकट कीमतें 15% बढ़ा दी हैं और आगे बढ़ोतरी की संभावना है। वियतनाम में राज्य मीडिया ने चेतावनी दी कि ईंधन महंगा होने से टिकट 70% तक बढ़ सकते हैं। क्वांटास (ऑस्ट्रेलिया), एयर न्यूजीलैंड और एसएएस जैसी एयरलाइंस ने भी अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर किराए बढ़ाए हैं।

उड़ानें रद्द, रूट बदले, मांग पर असर

संघर्ष के बाद मध्य पूर्व आने-जाने वाली 40,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। एयरलाइंस को रास्ता बदलना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त ईंधन ले जाना या रुकना पड़ता है। सिरियम डेटा के अनुसार, यह बदलाव लागत बढ़ा रहा है।

ऊंचे किराए से यात्रा मांग घट सकती है, खासकर पर्यटकों की। मॉर्निंगस्टार की लोरेन टैन ने कहा कि घूमने-फिरने वाले यात्री हतोत्साहित हो सकते हैं।

शेयरों में गिरावट, कुछ एयरलाइंस को फायदा भी

एयरलाइन शेयरों में भारी गिरावट आई है। आसियाना, कोरियन एयर, कैथे पैसिफिक आदि के शेयर गिरे। यूरोपीय कंपनियां जैसे एयर फ्रांस-केएलएम भी प्रभावित। हालांकि, मजबूत हेजिंग वाली एयरलाइंस जैसे लुफ्थांसा को फायदा हो सकता है।

कुछ अधिकारी आशावादी हैं कि संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है।ईंधन एयरलाइंस का दूसरा सबसे बड़ा खर्च है। अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो हजारों विमान ग्राउंड हो सकते हैं और कुछ कमजोर एयरलाइंस बंद भी हो सकती हैं। स्थिति पर सभी की नजर है।