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ईरान संघर्ष से बढ़ी वैश्विक चिंता, भारत के लिए गंभीर संकट: पंकज सारन

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव

पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सारन ने कहा कि ईरान से जुड़ा मौजूदा सैन्य संघर्ष भारत के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। उनके मुताबिक यह संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी भारतीयों और क्षेत्रीय कूटनीति पर गहरा असर डाल सकता है।

ऊर्जा सुरक्षा पर असर

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर काफी हद तक निर्भर है। यदि क्षेत्र में युद्ध तेज होता है तो तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो सकती है। इससे वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं और भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।

प्रवासी भारतीयों की चिंता

खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं। वहां से आने वाला प्रेषण भारत के लिए महत्वपूर्ण आय का स्रोत है। यदि क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो इन भारतीयों की सुरक्षा और रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।

नियम आधारित व्यवस्था पर संकट

सारन ने कहा कि मौजूदा संघर्ष यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय नियम आधारित व्यवस्था कमजोर हो चुकी है। वैश्विक राजनीति में अब ताकत के इस्तेमाल की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

पिछले दो दशकों का इतिहास

उन्होंने याद दिलाया कि पिछले 25 वर्षों में पश्चिम एशिया में कई बड़े संघर्ष हुए हैं। अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, लीबिया, यमन और गाजा जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से अस्थिरता बनी हुई है।

बड़ी शक्तियों की भूमिका

सारन ने कहा कि रूस, चीन और यूरोप जैसे बड़े देश इस संकट में खुलकर कोई निर्णायक कदम नहीं उठा रहे हैं।

भारत को क्या करना चाहिए

उनके अनुसार भारत को अपनी कूटनीतिक क्षमता का यथार्थवादी आकलन करना चाहिए और स्थिति पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

निष्कर्ष

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का प्रभाव आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। भारत के लिए यह जरूरी है कि वह अपनी रणनीति सावधानी से तय करे।


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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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