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रसोई गैस के लिए हाहाकार लंबी कतारें बनी मुसीबत का सबब,

रसोई गैस के लिए हाहाकार
लंबी कतारें बनी मुसीबत का सबब, शहडोल में सिलेंडर के लिए भटक रही जनता 

शहडोल….(विनय मिश्रा) 


इस्रायल, अमेरिका और ईरान युद्ध ने न सिर्फ आपसी मतभेद का मुखर प्रदर्शन है बल्कि इस युद्ध का अपरोक्ष रूप से दुनिया के अलग-अलग देशो में प्रभाव पड़ रहा है खाड़ी देशों से निर्यात होने वाले कच्चे तेल और घरेलू गैसों की आवाजाही पर भी इसका सीधे प्रभाव पड़ रहा है देश मे हालात इस कदर बद्दतर हैं कि रेस्टोरेंट, होटल,ढाबा में कामर्शियल सिलेंडर न मिलने से उन पर ताले लग रहे हैं जिसकी तादाद हजारों में हो चुकी है मप्र में शहडोल जिले का गैस भंडारण न सिर्फ मप्र बल्कि उप्र जैसे राज्यों में अपनी पहचान बना चुका है किंतु एलपीजी के अकूत भंडारण होने के बाद भी शहडोल जिले को मुश्किल समय मे गैस के लिए लम्बी कतारें लगानी पड़ रही है ।
जिले में इन दिनों रसोई गैस को लेकर हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। बीते कुछ दिनों से गैस की किल्लत के कारण आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि बुकिंग कराने के बाद भी उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।
गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें लग जाती हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और मजदूर वर्ग के लोग अपने घर की रसोई जलाने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि पूरे दिन कतार में खड़े रहने के बाद भी उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है।
यह विडंबना ही है कि जिस जिले की धरती में प्राकृतिक गैस के अकूत भंडार मौजूद हैं और जहां से गैस दूसरे प्रदेशों तक भेजी जा रही है, उसी जिले की जनता को रसोई गैस के लिए तरसना पड़ रहा है।
लोगों का आरोप है कि गैस वितरण व्यवस्था में भारी अव्यवस्था है, जिसके कारण आम उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। कई परिवारों के सामने रसोई चलाना तक मुश्किल हो गया है।
इधर प्रशासन और गैस एजेंसियों का कहना है कि शहर में गैस की आपूर्ति पर्याप्त है और जल्द ही अतिरिक्त गैस सिलेंडर उपलब्ध कराकर व्यवस्था को सामान्य किया जाएगा।
फिलहाल जिले की जनता को राहत का इंतजार है और लोगों की मांग है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का जल्द समाधान करे, ताकि घर-घर की रसोई फिर से सामान्य रूप से जल सके।

क्षेत्रीय,जनप्रतिनिधियों,विधायक, सांसदों की क्या जवाबदेही…

गौरतलब है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज शहडोल में 995 वर्ग किमी में फैले दो ब्लॉकों के साथ भारत की सबसे बड़ी कोल बेड मीथेन उत्पादक है। 2016-2017 से चालू, यह परियोजना तकरीबन 300 से अधिक कुओं से गैस निकालती है, जिसे 302 किमी लंबी पाइपलाइन द्वारा नेशनल ग्रिड से जोड़ा गया है। करीब ₹1,000 करोड़ निवेश की यह परियोजना शहडोल में लगभग 995 वर्ग किलोमीटर का फैला है
जिसमें 300 से अधिक कुएं परिचालन में हैं, यह प्रोजेक्ट शहडोल-फूलपुर 302 किमी लंबी पाइपलाइन के माध्यम से गैस का परिवहन किया जाता है, जो इसे राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जोड़ती है।
किंतु एलपीजी के ऐसे संकट के समय मे जिले के निवासियों को गैस के लिए एजेंसियों के बाहर कतारें लगानी पड़ रही है इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अपनी भूमिका है कि यहां के अकूत भंडारण को अन्य प्रदेश में ले जाया तो जा रहा है पर यहाँ के उपभोक्ताओं के लिए यह जीवाश्म किसी दुर्लभ उपभोग जैसा है हालांकि विपक्ष ने इसके लिए आवाज उठाया है और रिलायंस इंडस्ट्रीज को ऐसे जन सरोकार से चेताने के लिए घेरने की कोशिश का प्रयास करेगी का दम भर रही है तब तब आप उपले,लकड़ी और इंडक्शन का जुगाड़ कर लीजिए फिलहाल क्षेत्रीय नेताओ के घरों में गैस सिलेंडर की कमी आपको देखने को नही मिलेगी और न ही ये आपकी कतारो में शामिल होते दिखेंगे तब तक अच्छे दिनों का इंतेजार करिए।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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