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World Water Day: कैसे बिसलेरी बना 7000 करोड़ का साम्राज्य, जानिए पूरी कहानी

🔷 विश्व जल दिवस और पानी का बढ़ता महत्व

हर साल World Water Day के मौके पर पानी के महत्व और उसके संरक्षण पर चर्चा होती है। लेकिन इसी दिन एक ऐसी बिजनेस स्टोरी भी याद आती है, जिसने पानी को सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि एक बड़े उद्योग में बदल दिया।

भारत में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की बात हो और Bisleri का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। आज यह ब्रांड हजारों करोड़ रुपये के कारोबार का हिस्सा है, लेकिन इसकी शुरुआत बेहद साधारण थी।


🔷 4 लाख से शुरू हुआ सफर

Ramesh Chauhan ने 1969 में एक इटालियन ब्रांड बिसलेरी को मात्र 4 लाख रुपये में खरीदा था। उस समय भारत में बोतलबंद पानी का कोई खास बाजार नहीं था।

लोग नल का पानी पीते थे या उबालकर इस्तेमाल करते थे। ऐसे में पानी को बोतल में भरकर बेचना एक जोखिम भरा कदम था। कई लोग इसे मजाक समझते थे, लेकिन चौहान ने इस विचार पर भरोसा किया।


🔷 शुरुआती चुनौतियां

बिसलेरी की शुरुआत आसान नहीं थी। कंपनी को कई बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा:

  • लोगों में बोतलबंद पानी को लेकर जागरूकता की कमी
  • उत्पादन और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें
  • बाजार में भरोसे की कमी

इसके बावजूद Ramesh Chauhan ने हार नहीं मानी। उन्होंने धीरे-धीरे लोगों को साफ और सुरक्षित पानी के महत्व के बारे में जागरूक किया।


🔷 कांच से PET बोतलों तक का सफर

शुरुआत में बिसलेरी कांच की बोतलों में पानी बेचती थी, जो महंगी और सीमित थी। बाद में कंपनी ने PET (प्लास्टिक) बोतलों का इस्तेमाल शुरू किया, जिससे उत्पादन सस्ता हुआ और वितरण आसान हो गया।

यही बदलाव बिसलेरी के विस्तार का बड़ा कारण बना।


🔷 सॉफ्ट ड्रिंक से मिली पहचान

Ramesh Chauhan ने सिर्फ पानी के कारोबार तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने पारले ग्रुप के तहत सॉफ्ट ड्रिंक इंडस्ट्री में भी बड़ा कदम रखा।

उन्होंने Thums Up, Limca, Maaza जैसे लोकप्रिय ब्रांड लॉन्च किए, जिन्होंने भारतीय बाजार में बड़ी सफलता हासिल की।


🔷 कोका-कोला को बेचा बिजनेस

1993 में, जब Coca-Cola ने भारत में वापसी की, तो Ramesh Chauhan ने अपने सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड्स को उसे बेच दिया।

इस डील के बाद उन्होंने पूरी तरह बिसलेरी पर ध्यान केंद्रित किया और इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का लक्ष्य बनाया।


🔷 बिसलेरी का तेजी से विस्तार

सालों की मेहनत और सही रणनीति के चलते बिसलेरी भारत का सबसे बड़ा पैकेज्ड वॉटर ब्रांड बन गया।

आज कंपनी के देशभर में 100 से ज्यादा प्लांट्स हैं और यह बाजार में लगभग 36-38% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है।

इसके मुकाबले Kinley और Aquafina जैसे बड़े ब्रांड भी पीछे हैं।


🔷 7000 करोड़ की डील और बेटी का बड़ा फैसला

जब उम्र बढ़ने के साथ Ramesh Chauhan ने अपने बिजनेस को बेचने का फैसला किया, तो उन्होंने Tata Consumer Products को लगभग 6000-7000 करोड़ रुपये में बिसलेरी बेचने की योजना बनाई।

लेकिन उनकी बेटी Jayanti Chauhan ने इस फैसले का विरोध किया।

उन्होंने अपने पिता को समझाया कि यह सिर्फ एक बिजनेस नहीं, बल्कि परिवार की विरासत है। अंततः यह डील रुक गई और बिसलेरी परिवार के पास ही बनी रही।


🔷 नई पीढ़ी का नेतृत्व

आज Jayanti Chauhan बिसलेरी की कमान संभाल रही हैं। उनके नेतृत्व में कंपनी नए प्रोडक्ट्स और रणनीतियों के साथ बाजार में आगे बढ़ रही है।

उन्होंने फिजी ड्रिंक्स और अन्य नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए, जिससे कंपनी का पोर्टफोलियो और मजबूत हुआ।


🔷 पर्यावरण और जल संरक्षण

बिसलेरी सिर्फ बिजनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

कंपनी ने दक्षिण गुजरात में 46 चेक डैम बनाए हैं, जो हर साल अरबों लीटर पानी संचित करते हैं। इसके अलावा, प्लास्टिक रीसाइक्लिंग में भी कंपनी अग्रणी रही है।


🔷 क्या सीख मिलती है?

बिसलेरी की कहानी हमें कई महत्वपूर्ण सीख देती है:

  • सही समय पर लिया गया जोखिम सफलता दिला सकता है
  • नई सोच और धैर्य जरूरी है
  • परिवार और विरासत का महत्व समझना चाहिए

🔷 निष्कर्ष

Bisleri की कहानी 4 लाख रुपये के छोटे निवेश से शुरू होकर 7000 करोड़ रुपये के साम्राज्य तक पहुंचने की प्रेरणादायक यात्रा है।

यह सिर्फ एक बिजनेस स्टोरी नहीं, बल्कि दूरदृष्टि, मेहनत और सही फैसलों की मिसाल है।

आज World Water Day के मौके पर यह कहानी हमें यह याद दिलाती है कि पानी केवल जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि सही सोच के साथ एक बड़ा अवसर भी बन सकता है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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