हाल ही में एअर इंडिया की ‘फिट-टू-फ्लाई’ पॉलिसी ने फिटनेस के पैमानों पर एक नई बहस छेड़ दी है। यह बात पूरी तरह से समझ में आती है कि केबिन क्रू का हेल्दी और फिट रहना बेहद जरूरी है, लेकिन अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार की मानें, तो इस फिटनेस को मापने के लिए मुख्य रूप से ‘BMI’ का इस्तेमाल करना एक ऐसा कदम है जिसकी अपनी कुछ गंभीर सीमाएं हैं।

BMI vs healthy weight

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डॉक्टर ने बताया BMI का अधूरा सच

बीएमआई असल में एक बहुत ही साधारण-सा गणित है जो सिर्फ आपकी लंबाई और वजन को देखता है। इसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि यह आपके शरीर की मजबूत मांसपेशियों और एक्स्ट्रा चर्बी के बीच कोई फर्क नहीं कर पाता।

नतीजा यह होता है कि कसरत करने वाला एक गठीले बदन का फिट इंसान भी बीएमआई के हिसाब से ‘मोटा’ या ओवरवेट कहला सकता है। वहीं दूसरी तरफ, एक ऐसा व्यक्ति जिसका वजन तो एकदम सही है, लेकिन उसके शरीर में मांसपेशियां कम हैं और चर्बी ज्यादा है-उसे यह पैमाना ‘नॉर्मल’ बता देता है। बाहर से फिट दिखने वाला ऐसा व्यक्ति अंदरूनी तौर पर बीमार हो सकता है।

खतरा वजन से नहीं, शरीर की बनावट से है

डॉक्टर बताते हैं मेडिकल साइंस में ‘सार्कोपेनिया’ (उम्र या बीमारी के साथ मांसपेशियों का सिकुड़ना) और ‘मेटाबॉलिक सिंड्रोम’ जैसी स्थितियां इस बात का सुबूत हैं। इन बीमारियों में यह बात ज्यादा मायने नहीं रखती कि आपका कुल वजन कितना है, बल्कि यह देखना ज्यादा जरूरी होता है कि शरीर में चर्बी कहां जमा है।

सही सेहत मापने के असली पैमाने

वैज्ञानिक तथ्य बताते हैं कि इंसान के स्वास्थ्य और दिल से जुड़ी बीमारियों का सटीक अंदाजा लगाने के लिए BMI से कहीं बेहतर ये दो तरीके हैं:

  • कमर का नाप: आपकी कमर की चौड़ाई कितनी है।
  • कमर और लंबाई का अनुपात: आपकी ऊंचाई के मुकाबले आपकी कमर का घेरा कितना है।

ये दोनों तरीके शरीर के अंदरूनी हिस्सों में जमा होने वाली हानिकारक चर्बी का एकदम सही सुराग देते हैं।

body mass index

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कैसी होनी चाहिए फिटनेस परखने की सही नीति?

किसी भी कर्मचारी या व्यक्ति की फिटनेस तय करने के लिए एक समझदारी भरा और निष्पक्ष तरीका अपनाया जाना चाहिए। इस तरीके में ये चीजें शामिल होनी चाहिए:

  • कमर और ऊंचाई से जुड़े पैमाने।
  • शारीरिक फुर्ती और काम करने की क्षमता का टेस्ट।
  • रेगुलर हेल्थ चेकअप, जिसमें मेटाबॉलिक मार्कर्स को परखा जाए।

असली फिटनेस सिर्फ वजन नापने वाली मशीन पर सही नंबर दिखने का नाम नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करती है कि आपके शरीर की बनावट कैसी है और आप अंदर से कितने स्वस्थ हैं। जब नीतियां इस सच्चाई को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी, तभी वे सही मायनों में वैज्ञानिक और हर किसी के लिए न्यायसंगत होंगी।