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आईजीएनटीयू में अब स्थानीय छात्राओं को हाॅस्टल अनिवार्य तौर पर मिलने के आदेश जारी

 

‘खबर का असर’

( डिजिटल सत्याग्रह ने वर्षों की समस्या का किया समाधान )

शहडोल/अनूपपुर
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) अमरकंटक में अंचल के छात्रों को हॉस्टल सुविधा नहीं मिलने से छात्रों के साथ ही अभिभावक बीते वर्षों से लगातार परेशान हो रहे थें, हाॅस्टल में सीट न मिलने की स्थिति में खासकर छात्राओं को पढ़ाई छोड़ने तक की नौबत आ जाती थी, क्योंकि विश्वविद्यालय परिसर के बाहर रहने की कोई व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में विश्वविद्यालय परिसर के बाहर छात्राएं झुग्गी-झोपड़ी में रहकर पढ़ाई करती थीं।
इस आशय से पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में अध्ययनरत छात्र रवि त्रिपाठी और सभी छात्र-छात्रा 17 जुलाई से बड़ी मुखरता से प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और शिक्षा मंत्रालय के समक्ष तमाम डिजिटल माध्यमों से अपनी समस्या ऊपर पहुंचा रहे थें, जिसे छात्रों ने ही डिजिटल सत्याग्रह का नाम दिया है। जिससे शुक्रवार 21 जुलाई को छात्रों की मांग पर चीफ वार्डन प्रोफेसर नवीन शर्मा ने ईमेल कर के जानकारी दी कि शहडोल संभाग और गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की सभी छात्राओं को हाॅस्टल की सुविधा दिए जाने के आदेश कुलपति प्रो श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने दिए हैं, यह आदेश तत्काल से प्रभावी माना जाएगा। सिर्फ गौरेला पेंड्रा मरवाही (शहर), अमरकंटक और राजेंद्रग्राम से आने वाली छात्राओं के विषय मे उनकी सुविधाओं अनुसार विचार किया जाएगा क्योंकि यह क्षेत्र विश्वविद्यालय से 25-30 किमी के अन्तराल पर हैं तो अक्सर छात्र-छात्राएं घर से ही आवागवन करना उचित समझती हैं। चीफ वार्डन नवीन शर्मा ने ईमेल के माध्यम से सभी छात्राओं को विश्वविद्यालय आकर हाॅस्टल वेरीफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर सीट सुनिश्चित कराने को कहा है।

 

छात्र कार्यकर्ता रवि त्रिपाठी ने बताया कि स्थानीय छात्राओं के लिए हाॅस्टल की सुविधा सुनिश्चित होने की खबर से छात्राओं ने कुलपति सहित पूरे प्रबंधन को धन्यवाद कहा है। रवि ने बताया कि जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना अमरकंटक की पुण्य और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में तात्कालिक मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने तात्कालिक म.प्र. के वन एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री विजय शाह और शहडोल से तात्कालिक सांसद दलपत सिंह परास्ते और जाने-माने गांधीवादी और राष्ट्रीय सेवा योजना के संस्थापक डॉ. एस एन सुब्बाराव की उपस्थिति में करते हुए कहा था कि
आज हम अमरकंटक की पावन भूमि में एक ऐसे ज्योतिस्तंभ को स्थापित करने जा रहे हैं, जो ज्ञान-विज्ञान की रोशनी से देश के जनजातीय क्षेत्रों में युवावर्ग को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए नई दिशा देगा और जो दुनिया के किसी भी बेहतर से बेहतर शिक्षा केन्द्र से कम नहीं ऑंका जाएगा।
इतनी नेक मंशा में सबसे बड़ी बाधा तो यहां के स्थानीय छात्र-छात्राओं का विश्वविद्यालय में प्रवेश न ले पाना है, और जो प्रवेश ले लेते हैं उनको हाॅस्टल आदि जैसी मूल जरूरतों का डर दिखा कर विश्वस्तरीय शिक्षा गुणवत्ता से अलग रखने से स्व. अर्जुन सिंह जैसे विकास पुरुषों की मंशा कहीं न कहीं चोंट खा जाती है। इसके लिए संभाग में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक की विश्वस्तरीय शिक्षा प्रणाली, शोध प्रणाली का प्रचार-प्रसार कर अंचल के छात्रों की सूची में पहला स्थान जनजातीय विश्वविद्यालय का हो ऐसा प्रयास यहां के जनप्रतिनिधियों खासकर शहडोल सांसद को करना चहिए साथ ही स्व. अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह राहुल (पूर्व विधायक चुरहट विधानसभा) को भी इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि जनजातीय विश्वविद्यालय की नींव मे इनके पिता का पसीना है।
रवि त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्र हित में अभी कई मुद्दों पर अभी प्रबंधन का ध्यानाकर्षण कराना बांकी है जिसके लिए साथी छात्रों द्वारा प्रबंधन से बातचीत और डिजिटल सत्याग्रह सहित सभी प्रभावी कला-कौतुक जारी रहेंगे।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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