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नियम और कायदों को ताक में रखकर पंचायत चला रहा है निरंकुश सचिव राकेश त्रिपाठी

कछुवे की चाल से चल रहे हैं विकास कार्य

वर्षों पूर्व स्वीकृत कार्यों के अभी तक जारी नहीं हो पाए पूर्णता प्रमाणपत्र

मामला बुढार जनपद के ग्राम पंचायत घोरवे का                 

दीपक पाण्डेय की रिपोर्ट……

शहडोल बुढार।।

सरकारें अपनी विकास योजनाओं को लेकर चाहे जितनी भी पीठ थपथपाए, लेकिन धरातल पर इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार ही जब सरकार की योजनाओं का पलीता लगाने पर उतारू हो जाएं तो शासन की मंशा पर प्रश्नचिन्ह उठाना लाजिमी हैं ,हमेशा विवादों में रहने वाली बुढार जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत घोरवे की तस्वीर तो यही हालात बयां कर रहे हैं ।

राशि हजम, कार्य अपूर्ण

यदि पंचायतों की जानकारी के विषय में जानकारी के लिए शासन द्वारा बनाई गई वेब पोर्टल की मानें तो घोरवे पंचायत में स्कूल की बाउंड्री वॉल , स्टॉपडेम, सीसी रोड , सार्वजनिक चबूतरा जैसे कई विकासोन्मुखी कार्य स्वीकृत हैं और इन कार्यों का कार्य एजेंसी ग्राम पंचायत द्वारा राशि का आहरण भी कर लिया गया है किन्तु धरातल और अभिलेखों में ये कार्य अभी भी अपूर्ण दिख रहे हैं , लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की क्या मजाल जो निरंकुश सचिव राकेश त्रिपाठी पर नकेल कस सकें ।

राजनैतिक धौंस और झूठे आरोपों के डर से कार्यवाही करने से बचते अधिकारी

कुछ ग्रामीणों ने यह बताया कि सचिव त्रिपाठी ने पूरे पंचायत को अपनी निजी संपत्ति बना रखा है , यहां तक कि निर्माण कार्यों के अनुश्रवण के लिए जनपद में तैनात अमला भी राकेश के सामने बौना नजर आता है , लोगों ने दबी जुबान में यह भी बताया की इस सचिव को जनपद पंचायत पूर्व उपाध्यक्ष के पति जो भाजपा का पूर्व मंडल अध्यक्ष भी रह चुका है का वरदहस्त प्राप्त है और लोगों पर बात बात पर एसी एसटी एक्ट लगाने की धमकी पर जिम्मेदार भी मौन हो जाते हैं ।

पूर्णता प्रमाण पत्र की नहीं रह गई कोई अहमियत

शासन के अभिलेखों में कार्य तब ही पूर्ण माना जाता है की जब उस कार्य का पूर्णता प्रमाण पत्र सक्षम अधिकारी द्वारा प्रदान किया जाए , लेकिन वेब पोर्टल पंचायत दर्पण के अनुसार वित्तीय वर्ष 2016 -17 से वित्तीय वर्ष 2022-23 तक स्वीकृत कार्यों के पूर्णता प्रमाणपत्र जारी नहीं हुए हैं , जिम्मेदारों की ऐसी क्या मजबूरी है जो सचिव को कार्यपूर्ण कर प्रमाणपत्र के लिए लेख नहीं करते।

स्टॉपडेम बना बीरबल की खिचड़ी

पंचायत की मुख्य सड़क से 20 मीटर दूर बन रहा एक स्टॉपडेम सचिव के लिए बीरबल की खिचड़ी साबित हो रहा है , लगभग चार वर्ष पूर्ण स्वीकृत यह कार्य आज भी अनवरत जारी है लेकिन कार्यस्थल का जायजा लिया जाए तो यहां कई अनियमितताएं देखने को मिल सकती हैं , कार्यस्थल से सूचना पटल का गायब होना ही पारदर्शिता की कहानी स्वयं बखान कर रहा है और जिम्मेदार अधिकारी केवल कार्यवाही और सुधार का आश्वासन देकर प्रश्नकर्ताओं को बरगला दिया जाता है ।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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