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सियासी उठापटक के बीच सम्पन्न होगा विधानसभा चुनाव

विधानसभा चुनाव : सियासी उठापटक के बीच सम्पन्न होगा अनूपपुर विधानसभा चुनाव :

अनूपपुर/

वैसे अभी विधानसभा चुनाव होने का ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन जमीनी स्तर पर प्रचार-प्रसार जोरो से जारी है। एवं मतदाता को रिझाने हेतु भाजपा-कांग्रेस के कार्यकर्ता मैदान में उतर चुके हैं। और जुलाई माह में ही शहडोल में प्रधानमंत्री मोदी एवं हालही में अनूपपुर में अजय सिंह राहुल का दौरा भी विधानसभा चुनाव के ऐलान की सुगबुगाहट सी है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के द्वारा पार्टी हाईकमान तक यह बात पहुँचाने के लिए कि विधायकीय टिकट हेतु कौन प्रत्याशी उपयुक्त होगा की प्रक्रिया प्रारम्भ हो चुकी है। इसी तारतम्य में अनूपपुर विधानसभा में कांग्रेस दो भागो में विभाजित हो भी चुके है। जहाँ एक खेमा रमेश सिंह तो दूसरा खेमा विश्वनाथ सिंह के विधायक के टिकट चयन हेतु रस्साकसी जारी है। हालांकि वर्ष 2020 के विधानसभा उपचुनाव पर बिसाहूलाल से लगभग 50 हजार वोटो से पराजित होने के बाद विश्वनाथ सिंह एवं विश्वनाथ का खेमा पार्टी हाईकमान से खुलकर टिकट मांगने से परहेज महसूस कर रहा है। लेकिन कांग्रेस रमेश सिंह की अगुवाई में चुनाव लड़ने से जरा भी संकोच करते हुए नहीं दिखाई पड़ते हैं।
बहरहाल इस सियासी उठापटक में कांग्रेस दो खेमो में आ गई है। लेकिन वहीं भाजपा पार्टी यह उम्मीद लगाए बैठी है कि कांग्रेस कोई कमजोर प्रत्याशी का चयन करे जिससे अनूपपुर विधानसभा चुनाव के जीत हेतु भाजपा का राह आसान हो जाए। लेकिन ऐसे होते दिखाई नहीं पड़ रहा है। क्योंकि कांग्रेस जनता की बीच भले अपने-अपने प्रत्याशी के टिकट की मांग पर दो भागो में बंटे हों, लेकिन टिकट चयन के बाद कांग्रेस के चयनित प्रत्याशी के विजय हेतु दम ख़म झोंकने से पीछे नहीं हटेगे। ऐसे में यह कहना कोई जल्दबाजी नहीं होगी कि भाजपा की राह आसान नहीं है। इसके अतिरिक्त यह बात ज्यादा अपिलात्मक है कि जितना मजबूत खेमा रमेश सिंह का है उतना ही मजबूत खेमा विश्वनाथ सिंह का भी जान पड़ता है, क्योंकि बीते विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की लहर होने के बावजूद बिसाहूलाल को टक्कर देने का सामर्थ्य जुटाने में विश्वनाथ सिंह ही सक्षम साबित हुए थे। लेकिन अब की जो मौजूदा स्थिति है वह ठीक उपचुनाव के विपरीत है। क्योंकि रमेश सिंह तब प्रशासनिक पद से इस्तीफा देकर राजनीति में सक्रिय हुए थे और पार्टी रमेश की राजनीतिक सक्रियता से परिचित नहीं थी। लेकिन 3 वर्ष बीत जाने के बाद रमेश सिंह ने पार्टी के प्रति अपना समर्पण, श्रम और राजनीतिक सक्रियता का परिचय तो दिया है। और प्रदेश स्तर तक अपनी राजनीतिक जागरूकता परिचय देते हुए लगातार पार्टी से जुड़कर काम किया एवं पार्टी के खेमाबंदी तथा पार्टी के नीति से असहमत खेमे को संगठित करने में भी सक्षम साबित हुए हैं। इसलिए कांग्रेस अबकी विधानसभा चुनाव में रमेश सिंह पर दांव लगाने से पीछे नहीं हटेगी।
ज्ञात होकि जनता के द्वारा शिवराज को मुख्यमंत्री के रूप में अस्वीकार करते हुए मध्यप्रदेश में सरकार पलट दिया था। लेकिन भाजपा ने तोड़मरोड़ कर डबल इंजन की सरकार बनाई। लेकिन कहीं न कहीं भाजपा में अंतर्कलह मंत्रिमंडल विस्तार से ही प्रारम्भ हो गया था। तथा सिंधिया समर्थको को पार्टी में तबज्जो न मिलने से नाराज भी चल रहे थे। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि मंत्रिमंडल भंग होने के बाद सम्भवतः सिंधिया समर्थक पार्टी से लेफ्ट-राइट कर सकते हैं। लेकिन अब ऐसा करने का भी कोई लाभ कांग्रेस पार्टी को होने वाला नहीं और ना ही कांग्रेस उन विधायकों को अपने पार्टी में पुनः वापस भर कर कोई जोखिम लेना पसंद करेगी। ऐसे में यह बात बिसाहूलाल में आकर रुक जाता है कि पिछले बार के चुनाव में बिसाहूलाल ने भाजपा के टिकट से चुनाव तो लड़ लिया लेकिन पुनः भाजपा बिसाहूलाल पर दांव खेलेंगे की नहीं इस पर संशय इसलिए भी बरकरार है। क्योंकि राज्यमंत्री के प्राप्त दर्जे से रामलाल संतुष्ट हैं अथवा नहीं यह भाजपा के लिए जरूरी सवाल होगा। और रामलाल का मन टटोले बिना भाजपा अब कोई नया जोखिम नहीं मोड़ लेगी। बावजूद अगर भाजपा रामलाल को दरकिनार कर पुनः बिसाहूलाल को टिकट देते हैं, तो ऐसे में रामलाल किस करवट बैठ जायेंगे, यह भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगा। अपितु रामलाल भाजपा के निर्णय से कई बार सहमत भी रहें और बगावत कि आहट अभी तक विपक्षी महसूस नहीं कर पाया, लेकिन बीते 5 वर्ष विधायक पद से दूर रहने की पीड़ा रामलाल को कहीं न कहीं पद पर लौटने हेतु प्रेरित करता होगा। इसलिए यह कहा नहीं जा सकता कि अबकी बार रामलाल भाजपा के निर्णय से पूर्णतः सहमत होंगे या असहमत इसका निर्णय स्वयं रामलाल पर हो सकता है। वहीं अगर रामलाल राज्यमंत्री प्राप्त दर्जा से संतुष्ट महसूस करते हैं, तो सम्भवतः आगामी 5 वर्ष तक रामलाल को विधायक पद पर लौटने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। और इस बीच प्रदेश की राजनीतिक फिजा में जो तब्दीली आयेगी उसके लिए रामलाल को अपनी राजनीतिक जागरूकता एवं राजनीतिक सक्रियता को और प्रबल करना होगा। ताकि रामलाल का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित रह सके।
-राजकमल पाण्डेय

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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