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विधायक के क्षेत्र में शव को कंधे पर ले जाता लाचार पिता, कीचड़ से सने पाँव डगमगाते रहे पर नही मिला विकास की यात्रा

फिर भी आप विकास पर्व मनाओ

शहडोल।।

विनय मिश्रा…

राजनीति एक ऐसी फिजा है जहाँ हर जातक को इसकी वादियों में खुश्क माहौल ही नजर आता है  यानी ऐसी रेवड़ी जो खाने से मीठा और छूने से मखमल। अब शहडोल जिले की विकास यात्रा और विकास पर्व पर गौर कर लें बीते कुछ माह पहले जिले में विकास की ऐसी यात्रा निकाली गई थी मानो अब वह विकास यात्रा फूलकर गुब्बारा हो गया हो। चारो ओर विकास के डीप जगमगा रहे हैं।ऐसी विकास यात्रा जहां चलने के लिए सड़कें नही हैं और सड़क के कीचड़ों में पैदल चलता हुआ एक पिता अपने ही बच्चे का शव अपने कंधे पर ले जाता है।अगर इसे विकास यात्रा और विकास पर्व कहा जाता है तो शायद श्मशान यात्रा इसके लिए एक छोटा शब्द हो जाएगा। अगर विकास को जगाया जाए तो विकास भी आँख मीचते यह बता देगा कि उसे अभी मुह पर छीटे मारने की आवश्यकता है।

एक दूसरा पहलू जहां विकास के झूठें ढोल को मुनादी की आवश्यकता पड़ गई जब एक गर्भवती महिला को खाट पर लिटाकर उसे प्रसव के लिए हॉस्पिटल ले जाया जा रहा था और महिला रास्ते मे ही शिशु को जन्म दे दी।

आप,अगर इसे विकास पर्व कहते हैं तो निश्चित तौर पर रामराज्य आ चुका है और सबको अपने घरों में फुलझड़ियां जलाने की आवश्यकता है ताकि ऐसे पर्व को दिन के उजाले में नही रात के अंधेरे में तो बड़े गर्व के साँथ मनाया जा सके।

फिर मत कहना कि मैं विकास हूँ मुझे यात्रा करना है यात्रा के साँथ साँथ मुझे पर्व भी मनाना है। ताकि भीड़ के एक हिस्से को ऐसे संवेदनशील मुद्दे से भटकाया जा सके ।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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