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“मुसाफिर की डायरी”स्वच्छ भारत मिशन पर पलीता लगाता कुत्तों का मल

स्वच्छ भारत मिशन पर पलीता लगाते कुत्तो के झाड़े।।
मनुष्य के पास इतनी फुर्सत है कि वह कुत्ता पालने के लिए बंगलो और आलीशान मकान का निर्माण करता है। और स्वयं जमीन में सोता है और कुत्तों का बिस्तर में सुलाता है। आप आम तौर पर देखते होंगे कि लोग चरपहिया वाहन में कुत्तों को लिए फिरते हैं। अब चूँकि जब से सरकार ने शेर पालने पर प्रतिबंध लगा रखा है तब से मनुष्य कुत्ता पालकर स्वयं को शेर पालने का बोध कराता है। मनुष्य खुद को शेर के स्वाभाव का समझता है लेकिन कुत्ता पालकर कैसे शेर हो पाएगा इससे अंजान रहता है। हालाँकि जब से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन पर जोर दिया है तब लोग कुत्ता पालने में ज्यादा तेजी लाए हैं ताकि स्वच्छ भारत मिशन में पलीता लगाते हुए नगर के रहवासियों के हर द्वार पर गंदगी में वृद्धि हेतु झाड़े कराते रहे। और नगरपालिका के सफाई कर्मचारी कुत्तों का झाड़े साफ़ करने में व्यस्त रहे। हालाँकि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत मोदी सरकार ने मनुष्यों के लिए शौचालय निर्माण हेतु 12-12 हजार की राशि दिया था और देश की जनता ने बनवाया भी है और कुछ आज भी उपयोग कर रहे हैं। लेकिन मोदी सरकार इस उद्देश्य से शौलालय निर्माण हेतु राशि स्वीकृत किए थे ताकि जो मनुष्य किसी के द्वार व चौक-चौराहे पर झाड़े करता है उससे निजात मिल सके। लेकिन अब गंदगी में वृद्धि हेतु मनुष्य कुत्तो को झाड़े करा रहा है। यानि मोदी जी स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत कुत्तो के लिए शौचालय निर्माण करवाएं तक जाकर देश पूर्णतः स्वच्छ होगा। और नगरपालिका के सफाई कर्मचारी कुत्तों का झाड़े साफ़ करने से निजात पाएं। क्योंकि हर घर से लोग रोज सुबह-सुबह कहीं न कहीं जाते हैं। कोई दफ़्तर जाता है, कोई स्कूल-कॉलेज पढ़ने-पढ़ाने जाता है, कोई अदालत जाता है, कोई यूँ ही विचरने निकल जाता है। इस देश में हर मनुष्य भागदौड़ में व्यस्त है। लेकिन राह में जाते हुए जब कुत्ते का झाड़े देखता है तो वह अपने स्वच्छता में संदेह न हो इसलिए झाड़े से किनारा कश्ते हुए जाता है। और जिसे कहीं नही जाना है, कहीं नही पहुंचा है तथा इस दौड़ से बाहर है वह कुत्ता पालकर द्वार में झाड़े कराकर अपनी मानसिक क्रूरता को दर्शाते हुए सबको दौड़ से बाहर रखना-देखना चाहता है। इस भीड़ में मुसाफिर भी निकल रहा है। आज मुसाफिर इसी सिलसिले में निकला है। मुसाफिर देख रहा है कि नगर की हर दूसरी द्वेड़ी में एक कुत्ता बैठा है, किसी के बंगलो और आलीशान मकानों में कुत्ता बंधा है जो आते जाते लोगों का आवभगत करते हुए पूछता है कि कहाँ जा रहे हों हमें भी विचरने के लिए ले चलो आदि-आदि। इसी संदर्भ में कुछ लोग द्वार में बैठे हुए सरकारों की आलोचना करते हुए कह रहे हैं कि सरकार ने मनुष्य को दंड देने हेतु जेल बना रखे हैं लेकिन कुत्तों के लिए हमारा नगरपालिका कुत्तागृह नही बना पाया। जिसके परिणामस्वरूप नगर में कुत्तों की भरमार है। वहीं म.प्र. के सागर जिले के नगर निगम ने डॉग-टैक्स लगा कर कुत्ता पालने के शौकीन लोगो के चेतना में खलल पैदा कर दिया है। तथा जर्मन, बुलडॉग, देशी, विदेशी, पिटबुल व भाँति-भाँति के कुत्तों पर अलग-अलग टैक्स वसूलने का प्रस्ताव पारित किया है। लेकिन हमारी नगरपालिका है कि डॉग-टैक्स वसूलने में असमर्थ है। जबकि कुत्ता पाल कर कुछ मनुष्य रोटी खाते हैं और कुत्ते को बोटी खिलाते हैं। और नगर के रहवासियों के हर द्वार में झाड़े करातें हैं। हालाँकि कुत्ता रौब झाड़ने का प्रतीक माना जाता है, लेकिन मनुष्य जब सब के सामने रौब झाड़ने से आहत हो जाता है, तो वह कुत्ता पालकर रौब झाड़ने का प्रयत्न करता है। मनुष्य की फितरत ऐसी है कि जिन्हें वह कह नही सकता की आप हमारे घर मत आया करिए वह कुत्ता पालकर अपने आलीशान मकान व बंगलो के गेट में लिख देता है कि कुत्तो से सावधान। मनुष्य स्वयं से ज्यादा कुत्तों का ख्याल रखता है। लेकिन वह अपने रोजाना के उपयोग वाले टॉयलेट व बाड़ी में झाड़े नही कराता, बल्कि वह नगर के चौक-चौराहे, मोहल्ला, गली में झाड़े कराते हैं। और नगर में दुर्गन्ध फैलाते हैं। इसके अतिरिक्त कई बार कुत्ते झुंड बनाकर राहगीरों पर झपड़ते भी हैं इस उद्देश्य कि हम से इजाजत लिए बिना हमारे मालिक के द्वार से गुजरे कैसे। और इस आपाधापी में कई राहगीर कुत्तों के हमले से लहूलुहान हो जाते हैं। लेकिन कुत्ते मनुष्य के वफादार जानवरों में एक माना जाता है इसलिए पाला भी जाता है। और मालिक के निर्देश का पालन करने के लिए आई बाढ़ में कूद मरने के लिए भी तत्पर रहता है। और वफ़ादारी के संदर्भ में कहा जाए तो कोई अचरज नही होगा कि जब मालिक कहता है डॉगी-डॉगी मत काटो अपना आदमी है तब कुत्ता समझता है कि वह मालिक का आदमी है। यानि मालिक कहे कि फलाने के द्वार में झाड़े कर आओ तो कुत्ता अपने मालिक के वफादारी का पालन करते हुए झाड़े कर आएगा। लेकिन जब मालिक कुत्तो को जंजीर से बांधकर झाड़े कराने ले जाता है, तो मालिक से अधिक कुत्ते में रौब ज्यादा होता है। मुसाफिर यह सब देख कर हैरान है कि मनुष्य के इतर कुत्ते में कितना सामर्थ्य होता है कि वह मनुष्य के जंजीर से बंध कर झाड़े करने जाता है। और प्रातः वोटी को खरीदने के लिए पैसे कमाने के लिए प्रेरित कर देता है। मुसाफिर तो चाहता है कि नगर की आबादी से ऊपर कुत्ते हों लेकिन नगरपालिका के राजस्व कर में वृद्धि हो इसलिए वह डॉग-टैक्स लगाकर वसूली की कार्रवाई शुरू करे। जिससे होगा यह कि मनुष्य कुत्ता भी पाल सकेंगे और रौब भी झाड़ सकेंगे। चूँकि रौब झाड़ने पर जबतक नगरपालिका टैक्स नही लगाएगी, तब तक मनुष्य कुत्ते पालते रहेंगे। और नगर के निवासरत लोगों के द्वेड़ी में झाड़े कराते रहेंगे। डॉग-टैक्स लगाने से पहला फायदा यह होगा कि मनुष्य सीमित कुत्ता पालेंगे और दूसरा फायदा यह होगा कि नगरपालिका के कर में वृद्धि होगी और सफाई कर्मचारियों को भी कुछ राहत मिलेगा। तथा जो आवारा कुत्ते हैं उनके लिए कुत्तागृह निर्माण से राहगीर निजात पा लेंगे। और कुत्तो को भी सुरक्षा में वृद्धि होगी। इसलिए डॉग-टैक्स तथा आवारा कुत्तों के लिए गृह निर्माण पर नगरपालिका को मंथन करना चाहिए।
-राजकमल पाण्डेय

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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