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ईरान की धमकी से वैश्विक चिंता बढ़ी: Apple, Google समेत अमेरिकी कंपनियां निशाने पर, ट्रंप ने ‘बीबी गन’ कहकर उड़ाया मजाक

तेहरान/वॉशिंगटन:

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी कॉरपोरेट जगत को लेकर एक बड़ा और विवादास्पद बयान जारी किया है। ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर उसके नेताओं या हितों पर हमले जारी रहे, तो वह अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाएगा। इस बयान के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है, वहीं अमेरिका की ओर से इस पर तीखी और व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस धमकी को गंभीरता से लेने के बजाय इसका मजाक उड़ाया। व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “वे किससे हमला करेंगे? बीबी गन से?” ट्रंप का यह बयान न केवल ईरान की सैन्य क्षमता पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अमेरिकी नेतृत्व फिलहाल इस चेतावनी को प्रत्यक्ष खतरे के तौर पर नहीं देख रहा।

किन कंपनियों को बनाया गया निशाना

IRGC की ओर से जारी बयान में कुल 18 अमेरिकी कंपनियों का जिक्र किया गया है, जिनमें दुनिया की दिग्गज टेक और इंडस्ट्रियल कंपनियां शामिल हैं। इनमें Apple, Google, Microsoft, Intel, IBM, Tesla और Boeing जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।

इन कंपनियों का चयन इस बात को दर्शाता है कि ईरान ने केवल सैन्य या सरकारी ठिकानों तक ही अपनी चेतावनी सीमित नहीं रखी, बल्कि उसने उन निजी संस्थानों को भी निशाने पर लिया है, जो वैश्विक स्तर पर अमेरिका की आर्थिक और तकनीकी ताकत का प्रतिनिधित्व करते हैं।

IRGC का सख्त संदेश

IRGC ने अपने बयान में कहा है कि “ईरान में होने वाले हर आतंकी हमले का जवाब दिया जाएगा और इसके लिए जिम्मेदार पक्षों को इसकी कीमत चुकानी होगी।” संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि संबंधित कंपनियों को अपनी-अपनी यूनिट्स के “तबाह होने” की संभावना के लिए तैयार रहना चाहिए।

बयान में कर्मचारियों को सीधे तौर पर सलाह दी गई कि वे अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल अपने कार्यस्थलों को छोड़ दें। यह चेतावनी इस बात का संकेत देती है कि ईरान संभावित रूप से इन कंपनियों के क्षेत्रीय दफ्तरों या प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकता है।

1 अप्रैल से कार्रवाई की चेतावनी

IRGC ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई 1 अप्रैल से तेहरान समयानुसार रात 8 बजे से शुरू हो सकती है। भारतीय समय के अनुसार यह रात करीब 10:30 बजे बनता है। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि हमलों का स्वरूप क्या होगा—क्या यह साइबर हमले होंगे, ड्रोन या मिसाइल हमले, या फिर किसी अन्य प्रकार की रणनीतिक कार्रवाई।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास साइबर क्षमताएं भी मजबूत हैं, ऐसे में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

ट्रंप का तंज और मीडिया से तीखी बातचीत

इस मुद्दे पर सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ने न केवल ईरान की धमकी का मजाक उड़ाया, बल्कि पत्रकारों से भी तीखे सवाल किए। उन्होंने पूछा कि आखिर ईरान ने “कैसे” हमला करने की बात कही है और क्या इस धमकी के पीछे कोई ठोस योजना है।

ट्रंप ने कहा, “आपको खुद नहीं पता कि खतरा क्या है। आप बस कह रहे हैं कि उन्होंने धमकी दी है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा, जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल इस स्थिति को नियंत्रित और सीमित मान रहा है।

वैश्विक प्रतिक्रिया और बढ़ती चिंता

इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया है। पश्चिम एशिया पहले से ही संघर्ष और अस्थिरता का केंद्र रहा है, और ऐसे में निजी कंपनियों को सीधे निशाना बनाने की धमकी एक नया और खतरनाक आयाम जोड़ती है।

कई सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ईरान की ओर से दबाव बनाने की रणनीति हो सकता है, ताकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव डाला जा सके। वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे संभावित हाइब्रिड वॉरफेयर—जिसमें साइबर, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक दबाव शामिल होते हैं—की दिशा में एक संकेत मानते हैं।

कंपनियों और कर्मचारियों पर असर

यदि स्थिति और गंभीर होती है, तो इन कंपनियों के क्षेत्रीय संचालन पर असर पड़ सकता है। कर्मचारियों की सुरक्षा, सप्लाई चेन और डिजिटल नेटवर्क पर खतरा बढ़ सकता है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां पहले ही ऐसे क्षेत्रों में अपने कर्मचारियों के लिए एडवाइजरी जारी करती रही हैं, और इस ताजा चेतावनी के बाद सुरक्षा उपायों को और कड़ा किया जा सकता है।

आगे क्या?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान की यह चेतावनी वास्तविक कार्रवाई में बदलती है या यह केवल कूटनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है। हालांकि, इस बयान ने अमेरिका-ईरान संबंधों में नई तल्खी जरूर जोड़ दी है।

दुनिया भर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है—क्या यह केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगा या फिर वैश्विक स्तर पर किसी बड़े टकराव की भूमिका तैयार हो रही है।

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