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जन विश्वास विधेयक: वाणिज्य मंत्रालय ने मामूली अपराधों से जुड़े मामलों को वापस लेने पर विचार करने का निर्देश दिया

Jan Vishwas Bill: Commerce Ministry wants departments to consider withdrawing cases involving minor offences

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में यह सुनिश्चित किया है कि भारत में लगभग पांच करोड़ मामले, जो मामूली अपराधों से जुड़े हैं, अब न्यायालय व्यवस्था से बाहर निकाले जाएं। उन्होंने कहा कि इन मामलों की काफी संख्या तो ऐसी है जो कभी कोर्ट तक जाने ही नहीं चाहिए थी।

गोयल के अनुसार, इन मुकदमों के निपटारे में न केवल न्यायालयों का समय बर्बाद होता है, बल्कि इससे आम नागरिकों को भी व्यस्त रखा जाता है। इसलिए वाणिज्य मंत्रालय ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे ऐसी मामूली प्रवृत्ति वाली शिकायतों पर पुनर्विचार करें और जहां संभव हो, मामलों को वापस लेने पर विचार करें।

मंत्री ने यह भी बताया कि जन विश्वास विधेयक के तहत इस दिशा में एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि न्यायपालिका पर अनावश्यक बोझ कम किया जा सके। इससे न केवल अदालतों के काम का बोझ कम होगा, बल्कि सरकार की न्याय व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के न्यायिक तंत्र में लंबित मामलों की संख्या बेहद चिंताजनक है और बड़ी संख्या में मामूली अपराधों के बिना कारण कोर्ट में मामलों की भरमार ने इसे और विकराल बना दिया है। ऐसे में इस तरह के कदमों को एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय की इस नई पहल से उम्मीद की जा रही है कि इससे न केवल अदालतों की गति बढ़ेगी, बल्कि लोगों का न्यायिक अनुभव भी बेहतर होगा। साथ ही, मामूली मामलों में कानूनी खर्च और समय की बचत होगी।

अब सवाल यह उठता है कि मंत्रालय के निर्देशों का स्वागत संबंधित विभागों और न्यायपालिका द्वारा किस हद तक किया जाएगा और इन मामूली केसों को वापस लेने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और प्रभावी साबित होगी।

इस दिशा में अगली कुछ महीनों में ही कई महत्वपूर्ण फैसले और कार्यवाही देखने को मिल सकती है, जो देश के न्याय तंत्र के सुधार में मील का पत्थर साबित होंगे।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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