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IGNOU: ओपन लर्निंग का एक मजबूत स्तंभ, दीक्षांत समारोह में उपाध्यक्ष का बयान

IGNOU a pillar of open learning, says V-P at convocation

नई दिल्ली: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के दीक्षांत समारोह में उपाध्यक्ष ने कहा कि आधुनिक विकास को परंपरा के साथ मिलकर चलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और परंपरा का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

उपाध्यक्ष ने कहा, “हमारे सांस्कृतिक मूल्यों को स्थायी बनाने के लिए आवश्यक है कि हम तकनीकी और आधुनिक विकास के साथ खुद को अपडेट करें। परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन ही सफलता की कुंजी है।” उन्होंने आगे कहा कि IGNOU इस दिशा में एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जहां शिक्षा को सभी तक पहुँचाने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन शिक्षण में हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित रखा जा रहा है।

दीक्षांत समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों के लाखों छात्रों को ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से शिक्षा देने वाले IGNOU के प्रयासों की खूब सराहना की गई। उपाध्यक्ष ने यह भी उल्लेख किया कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए शिक्षा का अधिकार होना चाहिए और शिक्षा को सर्वसुलभ बनाना देश का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करने के साथ-साथ व्यावहारिक और सामाजिक कौशल भी विकसित करने चाहिए जिससे छात्र पूरी तरह से सक्षम नागरिक बन सकें। उपाध्यक्ष के इस भाषण ने उपस्थित सभी श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया और शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीदें जगाईं।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति, शिक्षाविद और अन्य गण्यमान्य लोग उपस्थित थे, जिन्होंने उपाध्यक्ष के विचारों का स्वागत किया। उन्होंने भी इस बात पर बल दिया कि शिक्षा प्रणाली में न केवल आधुनिक तकनीकियों को अपनाने की आवश्यकता है, बल्कि हमारे सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को भी निरंतर सहेजकर रखना चाहिए।

IGNOU इस विचारधारा के साथ लगातार विकसित हो रहा है और देश की शिक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह विश्वविद्यालय अपने छात्रों को व्यावसायिक, शैक्षिक और नैतिक दृष्टि से सक्षम बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

इस प्रकार, उपाध्यक्ष का यह संदेश दर्शाता है कि आधुनिकता और परंपरा के सामंजस्य के बिना स्थायी विकास संभव नहीं है। उन्होंने सभी को शिक्षा के माध्यम से अपने संस्कारों को जीवित रखने और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने का आग्रह किया।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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