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सीबीएसई का नया पाठ्यक्रम रटंत शिक्षा से आगे बढ़ा, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार स्कूलों को अनुकूलन के लिए समय चाहिए

CBSE’s new curriculum moves beyond rote, but schools need time to adapt: experts

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने हाल ही में अपनी शिक्षा नीति में बदलाव करते हुए नया पाठ्यक्रम जारी किया है, जो पारंपरिक रटंत शिक्षा से हटकर अधिक व्यावहारिक और समझ आधारित है। इस नए पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में सोचने और समझने की क्षमता को बढ़ावा देना है, ताकि वे केवल याद करने वाले छात्र न रहें, बल्कि ज्ञान का सही इस्तेमाल कर सकें।

विशेषज्ञों ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि देश की शिक्षा प्रणाली को लंबे समय से रटंत और याददाश्त आधारित शिक्षा से पार पाना आवश्यक था। नए पाठ्यक्रम में विषयों की रूपरेखा को इस प्रकार तैयार किया गया है कि छात्र विषयों को बेहतर ढंग से समझ सकें और जीवन में उनका व्यावहारिक उपयोग कर सकें।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव को पूरी तरह से लागू करने के लिए स्कूलों को समय और संसाधनों की आवश्यकता होगी। प्रशिक्षण, पाठ्यपुस्तकों में बदलाव और शिक्षकों के दृष्टिकोण में परिवर्तन जैसे कई कारकों पर काम करना होगा। कुछ शिक्षकों ने भी इस बदलाव के प्रति अपनी चिंता जताते हुए कहा है कि वे नए तरीके से पढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।

शिक्षा विश्लेषकों का कहना है कि पाठ्यक्रम में सुधार से छात्रों को विविध दृष्टिकोणों को समझने और उनका विश्लेषण करने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी बेहतर तरीके से तैयार करेगा। सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि इस बदलाव को सहज और प्रभावी बनाने के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

CBSE के नये पाठ्यक्रम से संबंधित अधिक जानकारी और मार्गदर्शन स्कूलों तथा शिक्षकों को जल्दी ही उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि माता-पिता और शिक्षकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित कर विद्यार्थी केंद्रित शिक्षा पर ध्यान दिया जाए। इस पहल से भारतीय शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है, जिसके लंबे समय तक लाभ विद्यार्थियों और समाज दोनों को होंगे।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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