दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

आशा भोसले को याद कर संगीत जगत के सितारे हुए भावुक: उदित, अनु, हरिहरन समेत दिग्गजों ने यादें साझा कीं, कहा- उनकी विरासत अमर रहेगी

आशा भोसले को याद कर संगीत जगत के सितारे भावुक:उदित, अनु, हरिहरन समेत दिग्गजों ने यादें साझा कीं, कहा- उनकी विरासत हमेशा अमर रहेगी

भारत के महान गायिका आशा भोसले के निधन के बाद संगीत जगत में एक गहरा शोक छा गया है। उनकी आवाज और कला ने भारतीय संगीत में एक अलग मुकाम बनाया था। कई दिग्गज कलाकारों ने उन्हें याद करते हुए अपने अनुभव साझा किए और कहा कि उनकी विरासत सदियों तक अमर रहेगी।

गायक उदित नारायण ने कहा कि आशा जी का निधन संगीत जगत के लिए एक युग के अंत जैसा है। उन्होंने बताया कि उनका बचपन नेपाल में बीता, जहां वे रेडियो पर आशा भोसले को सुनते थे। मुंबई आकर उनसे गाना जीवन की बड़ी उपलब्धि थी। उन्होंने फिल्म ‘लगान’ के गाने “राधा कैसे ना जले” की रिकॉर्डिंग का किस्सा साझा किया और कहा कि आशा जी की वर्सेटिलिटी कभी खत्म न होने वाली थी। उनकी आवाज़ में हमेशा एक अद्भुत ताकत और जादू भरपूर था।

संगीतकार अनु मलिक ने अपनी भावुकता व्यक्त करते हुए बताया कि 14 वर्ष की उम्र में जब उन्होंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया, तब आशा भोसले व्यस्त होने के बावजूद चोटिल हाथ के साथ स्टूडियो आईं और उनका सहयोग किया। उन्होंने कहा कि आशा जी ने नई पीढ़ी के कलाकारों को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

गायक हरिहरन ने आशा जी को सरल, विनम्र और काम के प्रति समर्पित बताया। उन्होंने साझा किया कि 1980 के दशक में आशा जी के लिए एक गजल एल्बम में काम करते समय उनका व्यवहार हमेशा प्यार भरा और सीखने वाला था। हरिहरन ने कहा कि आशा जी ने कभी किसी को छोटा महसूस नहीं होने दिया। उनके गाने आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं।

कलाकार कैलाश खेर ने बताया कि 2007 में अमेरिका और कनाडा के टूर के दौरान आशा भोसले का व्यवहार अत्यंत विनम्र और मिलनसार था। वह हमेशा सभी के साथ प्रेमपूर्ण और बराबरी का व्यवहार करती थीं। कैलाश ने कहा कि उनकी यह विनम्रता और संवेदनशीलता उन्हें अलग बनाए रखती थी।

भजन सम्राट अनूप जलोटा ने आशा भोसले को भारतीय संगीत का मजबूत स्तंभ बताया। उन्होंने साझा किया कि आशा जी का खाना बनाने का शौक था और वे बहुत अच्छे कुक थीं। उनके नाम से दुनियाभर में कई रेस्टोरेंट चल रहे हैं, जहां उनकी पसंदीदा डिशेज मिलती हैं।

संगीतकार ललित पंडित ने बताया कि आशा जी न सिर्फ महान गायिका थीं, बल्कि खुशी फैलाने वाली इंसान भी थीं। उन्होंने कहा कि उनकी वर्सेटिलिटी का कोई मुकाबला नहीं, और उनके जाने से संगीत जगत में एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ है।

उत्तम सिंह ने कहा कि आशा भोसले के साथ काम करते हुए उन्हें कई यादें मिलीं, जिसमें एक बार रात के डेढ़ बजे खुद खाना बनाकर सबको खिलाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि उनकी प्रोफेशनलिज्म और समर्पण आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

डब्बू मलिक ने आशा जी को मां जैसी बताया जिन्होंने हर कलाकार को आत्मविश्वास दिया। उन्होंने कहा कि आशा भोसले का संगीत जीवन एक किताब की तरह है, जिससे कई कलाकार सीख सकते हैं।

फिल्म निर्देशक रमेश सिप्पी ने लता मंगेशकर और आशा भोसले को भारतीय संगीत के दो मजबूत स्तंभ कहा। उन्होंने आशा भोसले के शरारती, चुलबुले संगीत को याद करते हुए बताया कि उनका जाना संगीत की जादुई आवाज के हमेशा के लिए शांत हो जाने जैसा है।

संगीत जगत के ये सभी दिग्गज कलाकार एकमत हैं कि आशा भोसले की सरलता, मेहनत और नए कलाकारों को आगे बढ़ाने का जज़्बा उन्हें अनमोल बनाता है। उनकी आवाज और कला सदैव लोगों के दिलों में जीवित रहेगी। यह विरासत आने वाली पीढ़ियों को संगीत और समर्पण का सच्चा परिचय देती रहेगी।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!