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शीर्ष आईआईएम को और अधिक स्वायत्तता की आवश्यकता, विश्वविद्यालय बनने की दिशा में बढ़ना चाहिए: आईआईएम कोझिकोड निदेशक

Top IIMs need greater autonomy, must evolve into universities: IIM Kozhikode Director

आईआईएम कोझिकोड के निदेशक प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी ने एक विशेष साक्षात्कार में अपने संस्थान की सफलता की कहानी साझा की, जो डिजिटलीकरण, विविधीकरण और नवोन्मेष पर आधारित रणनीति के जरिये राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) में शीर्ष तीन में शामिल हो गया है। उन्होंने इस सफलता को संस्थान की दीर्घकालिक सोच और आधुनिक प्रबंधन शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम बताया।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत के शीर्ष छह आईआईएम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए अधिक नियामक स्वतंत्रता और स्वायत्तता की आवश्यकता है। “आईआईएमों को विश्वविद्यालयों की तरह स्वतंत्रता मिलनी चाहिए ताकि वे न केवल शिक्षा के स्तर को बढ़ा सकें, बल्कि शोध और नवाचार में भी और तेजी से आगे बढ़ सकें,” प्रोफेसर चटर्जी ने कहा।

आईआईएम कोझिकोड ने हाल के वर्षों में प्लेसमेंट प्रणाली को पूरी तरह से फिर से परिभाषित किया है। अब यह केवल नौकरियों का वितरण नहीं, बल्कि छात्रों की प्रतिभा को तैयार करने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने का एक अभ्यास बन गया है। इसके तहत छात्रों को बाजार की डिमांड के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है जिससे उनकी नौकरी मिलने की संभावनाएं अधिक मजबूत होती हैं।

डिजिटल टेक्नोलॉजी के माध्यम से शिक्षा के नए आयाम तलाशने पर भी प्रोफेसर चटर्जी ने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में शिक्षा में वृद्धि के लिए किसी प्रकार के प्रतिबंध नहीं बल्कि खुले दिल से संवाद और सही इस्तेमाल की जरूरत है। “AI को रोकने की बजाय हमें उसे समझना और उसका सकारात्मक इस्तेमाल करना चाहिए,” वे बोले।

आईआईएम कोझिकोड के निदेशक ने विस्तार से बताया कि कैसे संस्थान ने अपनी शिक्षा नीतियों में नवाचार और समावेशन को महत्व दिया है। उनका मानना है कि स्वायत्तता संस्थानों को नई सोच और नए तरीकों को अपनाने की क्षमता देती है, जिससे वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, “आईआईएमों का स्तर बढ़ाना केवल स्वाभाविक आवश्यकता नहीं, बल्कि देश के लिए रणनीतिक कदम है।”

यह साक्षात्कार न केवल आईआईएम कोझिकोड के वर्तमान प्रबंधन की सोच को प्रतिबिंबित करता है बल्कि भारतीय प्रबंधन शिक्षा के भविष्य की झलक भी प्रदान करता है। प्रोफेसर चटर्जी की राय में, बेहतर नियामक फ्रेमवर्क और बढ़ी हुई स्वायत्तता के जरिए भारतीय आईआईएम विश्व स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं और छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा तथा अवसर प्रदान कर सकते हैं।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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