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अब भारत में ही बनेंगे तेजस फाइटर जेट के इंजन: अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के बीच समझौता

अब भारत में ही बनेंगे तेजस फाइटर जेट के इंजन:अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के बीच समझौता

नई दिल्ली। अमेरिकी डिफेंस कंपनी GE एयरोस्पेस और भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच फाइटर जेट इंजन F414 के सह-निर्माण को लेकर तकनीकी समझौता हो गया है। यह डील पिछले तीन वर्षों की कड़ी बातचीत के बाद संभव हो पाई है और इसे भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियानों के तहत डिफेंस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

GE एयरोस्पेस और HAL के बीच तकनीकी मसलों पर सहमति के साथ अब भारत में F414 जेट इंजन का निर्माण होगा, जो कई लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होता है। इस इंजन का सह-निर्माण का प्रारंभिक समझौता साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान हुआ था। तब से दोनों कंपनियां तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) और उत्पादन प्रक्रियाओं पर चर्चा कर रही थीं, जो अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

इस डील से भारतीय वायुसेना के लिए अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के इंजन की उपलब्धता में सुधार होगा तथा विदेशों पर निर्भरता कम होगी। इसके अलावा, GE एयरोस्पेस ने भारत में F404-IN20 इंजन के मेंटेनेंस के लिए एक डोमेस्टिक फैसिलिटी बनाने का अनुबंध भी भारतीय वायुसेना के साथ साइन किया है। यह इंजन तेजस फाइटर जेट के लिए पावर प्रदान करता है। इस फैसिलिटी के बनने से इंजन की मेंटेनेंस प्रक्रिया भारत में ही होगी, जिससे समय और खर्च दोनों में कमी आएगी।

GE एयरोस्पेस के बयान के अनुसार, यह समझौता भारत-यूएस सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएगा और दोनों देशों के बीच 40 वर्षों से चली आ रही साझेदारी को मजबूत करेगा। कंपनी का मानना है कि इस पहल के कारण इंजन के टर्नअराउंड टाइम में सुधार होगा और भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता में वृद्धि होगी।

F414 इंजन भारत के भविष्य के विमान जैसे LCA तेजस मार्क-2 और AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के लिए महत्वपूर्ण है। यह इंजन विश्वसनीयता और शक्ति के लिहाज से खासा जाना जाता है। भारत में इसका निर्माण न केवल देश की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक एयरोस्पेस सप्लाई चेन में भी भारत की भागीदारी को बढ़ावा देगा।

GE एयरोस्पेस की डिफेंस एंड सिस्टम्स की वाइस प्रेसिडेंट रीटा फ्लेहर्टी ने कहा है कि भारतीय सशस्त्र बलों के समर्थन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता मजबूत है और नई डिपो फैसिलिटी से भारतीय वायुसेना को अपनी रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में कटिंग-एज टेक्नोलॉजी उपलब्ध रहेगी।

संक्षेप में कहा जाए तो यह संधि भारत के लिए एक रणनीतिक कदम है, जो न केवल रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा, बल्कि देश के औद्योगिक और तकनीकी विकास में भी सहायक होगा। यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और तकनीकी सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक प्रमुख कदम माना जा रहा है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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