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यूसीसी से जनजातीय पहचान मिटेगी: पश्चिम बंगाल के वन मंत्री

UCC will erase tribal identity: West Bengal Forest Minister

पश्चिम बंगाल । पश्चिम बंगाल के वन मंत्री ने हाल ही में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के खिलाफ अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह कोड जनजातीय समुदायों की पहचान को मिटा सकता है और उनकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक निजता को खतरा पहुंचा सकता है।

वन मंत्री ने स्पष्ट किया, “मैं खुद एक जनजातीय समुदाय से हूँ। जब भी मैं मुख्यमंत्री से बातचीत करती हूँ, तो मैं जनजातीय समुदायों की मांगें उठाती रहती हूँ, जैसे हमारे धार्मिक कोड को मान्यता देना। हम चाहते हैं कि हमारी रीति-रिवाज, परंपराएं और धर्म को सम्मान मिले।”

यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लाने का प्रस्ताव है, लेकिन इसका विरोध गांव-देहात और खासकर जनजातीय इलाकों में व्यापक रूप से हो रहा है। वन मंत्री के अनुसार, “हमारा धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित है। किसी भी प्रकार का कानून जो हमारी परंपराओं को प्रभावित करेगा, हम उसे स्वीकार नहीं कर सकते।”

भारत एक विविधतापूर्ण देश है जहाँ विभिन्न धर्म, जाति और जनजाति अपने अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ रहते हैं। यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर देश में कई बार विवाद छिड़े हैं, जिसमें जनजातीय समुदायों ने अपने हितों की रक्षा का आह्वान किया है।

वन मंत्री ने कहा, “हम अपनी विरासत को बचाए रखने के लिए सरकार से आग्रह करते हैं कि जनजातीय धर्म और सामाजिक नियमों की रक्षा की जाए। हमारी पहचान हमारी संस्कृति में निहित है।” उन्होंने आगे बताया कि मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान उन्होंने कई बार यह मांग उठाई है कि जनजातीय धार्मिक कोड को शरीरिक समानता के साथ स्वीकार किया जाए ताकि उनकी सांस्कृतिक स्वतंत्रता बनी रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करते समय जनजातीय समुदायों की विशेषताओं का ध्यान रखना बेहद आवश्यक होगा। उनकी सांस्कृतिक मान्यताओं के बिना कोई भी कानून पूर्ण रूप से समाज के सभी वर्गों के हित में नहीं हो सकता। इसके लिए सरकार को पारदर्शिता और समावेशी प्रक्रियाओं को अपनाना चाहिए।

यह स्पष्ट है कि जनजातीय समुदायों को लेकर कानून बनाते समय उनके धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का सम्मान करना न केवल आवश्यक है, बल्कि संवैधानिक आवश्यकता भी है। पश्चिम बंगाल के वन मंत्री द्वारा उठाई गई यह आवाज जनजातीय अधिकारों के प्रति सरकार और जनता की समझदारी बढ़ाने में सहायक होगी।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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