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अशोक पंडित ने लेंसकार्ट के स्टाइल गाइड पर जताई नाराजगी, कहा- हिजाब चलेगा लेकिन तिलक-बिंदी और कलावा नहीं; कंपनी के बायकॉट की मांग

लेंसकार्ट के 'स्टाइल गाइड' पर भड़के अशोक पंडित:कहा- हिजाब ठीक, लेकिन तिलक-बिंदी और कलावा नहीं; कंपनी के बायकॉट की अपील की

नई दिल्ली। फिल्ममेकर अशोक पंडित ने लेंसकार्ट की हाल ही में जारी की गई स्टाइल गाइड को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर उन्होंने कंपनी के व्यवहार को हिंदू बहुल भारत की संवेदनाओं के खिलाफ बताया और लेंसकार्ट के उत्पादों और सेवाओं का बहिष्कार करने की अपील की है।

अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पर स्टाइल गाइड की फोटो साझा करते हुए लिखा कि पीयूष बंसल अपने कर्मचारियों से यह कहते हैं कि हिजाब पहनना स्वीकार्य है, लेकिन तिलक, बिंदी और कलावा जैसी धार्मिक पहचान वाले प्रतीकों की अनुमति नहीं है। उनका तर्क है कि लेंसकार्ट जैसी कंपनी जो भारत जैसे हिंदू बहुल देश में काम करती है और जहां अधिकतर कर्मचारी व उपभोक्ता हिंदू हैं, उसे इस तरह की गाइडलाइन नहीं बनानी चाहिए।

अशोक पंडित ने स्टाइल गाइड के 11वें पेज का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें साफ़-साफ लिखा है कि हिजाब केवल काले रंग में ही पहनने की अनुमति होगी और यह कंपनी के लोगो को कवर नहीं कर सकता। इन निर्देशों के अनुसार, पगड़ी भी केवल काले रंग में पहनने की अनुमति है। वहीं धार्मिक टीका, तिलक, बिंदी और कलावा जैसी चीज़ें प्रतिबंधित हैं। मेहंदी लगाना भी स्टाफ के लिए मना है।

गाइडलाइन में यह भी लिखा गया है कि किसी भी प्रकार की टोपी या हैट पहनने की अनुमति नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, स्टोर में ब्लू टॉर्च और स्प्रे बोतल रखना, बालों के अस्त-व्यस्त होने पर हेयर नेट उपयोग करना और टैटू छिपाने के लिए काली फिटेड टी-शर्ट पहनना अनिवार्य है।

अशोक पंडित सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर अपनी सशक्त आवाज़ रखते रहे हैं। उन्होंने फिल्मी करियर की शुरुआत नुक्कड़, सर्कस और ये जो है जिंदगी जैसे प्रसिद्ध टीवी शो के असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में की। इसके बाद उन्होंने फिल्मी चक्कर, कोलगेट टॉप 10 और तेरे मेरे सपने जैसे कार्यक्रमों का निर्देशन किया। वे द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर और 72 हूरें जैसी फिल्मों के निर्माता भी हैं।

फिल्ममेकर की यह गंभीर प्रतिक्रिया और कंपनी के स्टाइल गाइड की यह नई नीति सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। कई लोग इस व्यवहार को धार्मिक आज़ादी और सहिष्णुता के खिलाफ करार दे रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसे कंपनी की अनुशासनात्मक नीति का हिस्सा मान रहे हैं।

लेंसकार्ट की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस विवाद के बीच सोशल मीडिया पर कंपनी के खिलाफ बायकॉट की अपील तेज हो रही है। यह मामला देश में कॉर्पोरेट गाइडलाइनों और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन की जटिलताओं को फिर से उजागर करता नजर आ रहा है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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