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शादी पर बोले विजय वर्मा: ‘उम्मीद पर दुनिया टिकी है’ – मटका किंग की स्टारकास्ट ने भावनाओं पर खुलकर कही बातें

शादी पर बोले विजय वर्मा - ‘उम्मीद पर दुनिया टिकी:मटका किंग की स्टारकास्ट बोली- भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकते, यही हमें जिंदा रखती है

नई दिल्ली। 60-70 के दशक की पृष्ठभूमि पर बनी वेब सीरीज ‘मटका किंग’ ने न केवल जुए की दुनिया की गूढ़ता को सामने रखा है, बल्कि उस दौर की सामाजिक और सांस्कृतिक परतों को भी उजागर किया है। दैनिक भास्कर की खास बातचीत में फिल्म के निर्देशक नागराज मंजुले और स्टारकास्ट विजय वर्मा, कृतिका कामरा, साईं तम्हंकर ने अपनी भूमिकाओं, सीरीज की कहानी और समाज के उन पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जो इस सीरीज को खास बनाते हैं।

नागराज मंजुले ने बताया कि ‘मटका किंग’ केवल जुए का खेल नहीं है, बल्कि इसके इर्द-गिर्द गढ़ी गई एक पूरी दुनिया की कहानी है, जो उस दौर की पहचान, इज्जत और सत्ता के बीच के खेल को दर्शाती है। मंजुले ने कहा, “हमने कोशिश की है कि 60-70 के दशक की जिंदगी को पूरी सजीवता के साथ पर्दे पर उतारा जाए। इसके लिए हमने कॉस्ट्यूम, प्रोडक्शन डिजाइन, म्यूजिक, और डीओपी की टीम के साथ मिलकर हर पहलू को बारीकी से तैयार किया।”

स्टारकास्ट की बात करें तो विजय वर्मा ने कहा कि नागराज मंजुले के साथ काम करने का मौका मिला तो मैंने तुरंत हां कर दी। उनकी स्क्रिप्ट की गहराई और किरदार की इंटेंसिटी ने मुझे बहुत प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि उनका किरदार अपने काम के प्रति ईमानदार है, लेकिन समाज उसे स्वीकार नहीं करता, जो उसकी कहानी का अहम हिस्सा है।

कृतिका कामरा ने अपने किरदार गुलरुख दुबाश के बारे में बताया कि यह किरदार एक अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आता है, लेकिन उसे इस जुए की दुनिया ने अपनी ओर आकर्षित किया है। वह कई जटिल भावनाओं और इच्छाओं के बीच उलझी हुई है, जो उसकी कहानी को और भी पेचीदा बनाती हैं।

साईं तम्हंकर ने महिला किरदारों के महत्व पर बात करते हुए कहा कि आज के दौर में महिला किरदारों को सिनेमा और ओटीटी में पहले से कहीं अधिक गहराई मिली है। उन्होंने कहा, “मेरे किरदार बरखा की खासियत यह है कि वह अपनी भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकती। वह अपने जज्बातों को खुलकर व्यक्त करती है, जो उसे बाकी किरदारों से अलग बनाता है।” साईं ने यह भी कहा कि यह एक सकारात्मक बदलाव है, लेकिन अभी भी सुधार की गुंजाइश है।

जब उनसे उम्मीद से जुड़ी पंक्ति “जिंदगी उम्मीद पर टिकी है” के बारे में पूछा गया, तो नागराज मंजुले ने कहा कि उम्मीद बनी रहे, बस चलते रहना चाहिए। विजय वर्मा ने कहा कि मुश्किल वक्त में केवल उम्मीद ही हमें थामे रखती है। कृतिका कामरा ने उम्मीद को जिंदा रखने वाली भावना बताया, वहीं साईं तम्हंकर ने कहा कि जिंदगी की ड्राइविंग फोर्स उम्मीद ही है।

अंत में जब विजय वर्मा से पूछा गया कि वह कब तक सिंगल रहेंगे, तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया, “दुनिया उम्मीद पर टिकी है, और फिलहाल उम्मीद ही मेरा पेट्रोल है।” यह जवाब दर्शाता है कि उनकी जिंदगी में भी उम्मीद की अहमियत कितनी है।

इस तरह, ‘मटका किंग’ केवल एक कहानी नहीं, बल्कि उस समाज का ऐतिहासिक और सामाजिक दस्तावेज है जिसने जुए की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। नागराज मंजुले और उनकी टीम की मेहनत ने इसे एक ऐसा रूप दिया है जो दर्शकों के दिलों को छू रहा है और उन्हें 60-70 के दशक की गहराई में ले जा रहा है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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