दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

एएनआरएफ करेगा शीर्ष 5–10% विश्वविद्यालयों से बाहर भी शोध का विस्तार; भारत में स्केलेबल नवाचार की ओर जागरूकता बढ़ी: डीएसटी सचिव

ANRF to expand research beyond top 5–10% universities; India pushes shift to scalable innovation: DST Secretary

भारत का शोध परिदृश्य अत्यंत असंतुलित है, जहां केवल 5 से 10 प्रतिशत विश्वविद्यालय ही गुणवत्तापूर्ण शोध उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए अमेरिकी नवाचार और अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) और सरकार द्वारा स्थापित ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) कोष की पहलें तेजी से सक्रिय हो रही हैं। प्रोफेसर अभय करन्दीकर के साथ हुए एक विशेष साक्षात्कार में इस दिशा में उठाए जा रहे कदमों और भविष्य की योजनाओं पर गहराई से चर्चा हुई।

प्रोफेसर करन्दीकर ने बताया कि ANRF का उद्देश्य केवल कुछ चुनिंदा विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वे शोध के समग्र परिवेश को समृद्ध बनाने के लिए उत्सुक हैं। उनका मानना है कि ट्रेनिंग, अवसंरचना और तकनीकी समर्थन के माध्यम से विश्वविद्यालयों में व्यापक स्तर पर शोध गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। इससे शोधकर्ताओं को न केवल गुणवत्ता बढ़ाने का अवसर मिलेगा, बल्कि उनकी उपलब्धियों का व्यावहारिक और उद्योग से संबंधित अनुप्रयोग भी प्रभावी ढंग से हो सकेगा।

इंटरव्यू के दौरान, प्रो. करन्दीकर ने RDI कोष का महत्व भी बताया, जो भारतीय अनुसंधान प्रणाली में मील का पत्थर साबित हो सकता है। इस कोष का उपयोग उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा, ताकि शोध का महत्व केवल प्रकाशनों तक सीमित न रहे बल्कि उसे व्यावसायिक उत्पादन और सामाजिक लाभ में परिवर्तित किया जा सके।

उन्होंने प्रकाशनों और शोध के मात्रात्मक आंकड़ों की बजाय गुणवत्तापूर्ण, ट्रांसलेशनल शोध यानी ऐसे शोध पर जोर दिया जो सीधे रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान की ओर ले जाए। ऐसे शोध को बढ़ावा देना, जो तकनीकी नवाचार और व्यावहारिक अनुप्रयोगों से जुड़ा हो, भारत की नवाचार क्षमता को व्यापक रूप देने में मदद करेगा।

इस पहल के तहत, अनुसंधान संस्थानों को आधुनिक उपकरणों और सुविधा सम्पन्न शोध केंद्रों के साथ समृद्ध किया जाएगा, जो छोटे और मध्यम स्तर के विश्वविद्यालयों को भी उच्च स्तरीय शोध करने में सक्षम बनाएंगे। इसके साथ ही, उद्योगजगत के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के बीच नेटवर्किंग एवं साझेदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे नयी तकनीकों और आविष्कारों का स्वदेशी विकास संभव हो सके।

इस प्रयास से भारत अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देगा और वैज्ञानिक अनुसन्धान के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम उठाएगा। प्रो. करन्दीकर ने इस बदलाव के लिए सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया है।

संक्षेप में, ANRF और ₹1 लाख करोड़ RDI कोष भारत के शोध-नवाचार परिदृश्य में बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसमें सभी विश्वविद्यालयों तक शोध का विस्तार, उद्योग एवं शिक्षा क्षेत्र की साझेदारी, और अनुसंधान को व्यावहारिक एवं सामाजिक उपयोगिता प्रदान करना शामिल है। यह पहल न केवल वैज्ञानिक शोध को प्रभावी बनाएगी बल्कि भारत को स्केलेबल नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर करेगी।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!