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सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की सुरक्षा से इनकार किया, अग्रिम जमानत के लिए असम कोर्ट का रुख करने को कहा

Supreme Court refuses to protect Pawan Khera, asks him to move Assam court for anticipatory bail

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पूर्व में आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा की पत्नी रिनिकी भूयन शर्मा के पास कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्ति है, जो मुख्यमंत्री द्वारा 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में दायर हलफनामे में घोषित नहीं की गई थी। इस मामले को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक और कानूनी विवाद जारी है।

पवन खेड़ा के इस आरोप के बाद असम राजनीति में मुद्दा गर्मा गया है और विपक्षी दलों ने इसे लेकर मुख्यमंत्री को कटघरे में खड़ा कर दिया था। वहीं, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा और उनकी पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया था।

इसी बीच, पवन खेड़ा ने मतदान से पहले ही अग्रिम जमानत की याचिका असम की अदालत में दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी और पवन खेड़ा को निर्देश दिया कि वे अग्रिम जमानत के लिए असम की स्थानीय अदालत का रुख करें।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे राजनीतिक रूप से ज्यादा नहीं देखना चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कहा है कि वे न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और आवश्यकतानुसार असम की अदालत में अपनी अगली याचिका प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा किकेंद्र सरकार और राज्य के विपक्षी दल इस मामले में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी सतर्कता बरतेंगे।

असम विधानसभा चुनाव नजदीक होते हुए विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर बढ़ता जा रहा है, जिसमें नेता अपने-अपने पक्ष की सफाई और मजबूती के लिए अदालतों का सहारा भी ले रहे हैं। आगामी दिनों में इस मामले में असम की अदालत के फैसले का इंतजार रहेगा।

विश्लेषकों के मुताबिक, इस विवाद का राजनीतिक प्रभाव विधानसभा चुनाव के नतीजों पर पड़ सकता है, इसलिए सभी दल सद्भावपूर्ण ढंग से कानूनी और राजनीतिक हल ढूंढने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में न्यायपालिका की भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र बनी हुई है, जो लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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