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भारत नई दवाओं की खोज के लक्ष्य में क्यों हो रहा है पीछे

Where India is going wrong in its goal to find new drugs

नई मेडिसिन खोजने के लिए किसी रोग की मूल जैविक प्रक्रिया को समझना अति आवश्यक होता है। लेकिन भारत में इस क्षेत्र में हमारी उपलब्धियां काफी कमजोर हैं, जो मुख्य रूप से कुछ गंभीर कमियों के कारण हैं। विशेष रूप से पश्चिमी देशों की जैविक डेटा पर निर्भरता और स्थानीय मूलभूत अनुसंधान के लिए अपर्याप्त संसाधन इस समस्या को बढ़ावा देते हैं।

देश में बीमारी की बायोलॉजिकल समझ विकसित करने का वर्तमान तरीका बहुत हद तक पश्चिमी आबादी से प्राप्त डेटा पर आधारित है। यह दृष्टिकोण भारतीय सामाजिक और आनुवंशिक परिवेश के बदलावों को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं करता, जिससे दवाओं की प्रभावशीलता और सुरक्षा की जांच में जटिलताएं आती हैं।

इसके अतिरिक्त, स्थानीय वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने और उसका वित्तीय समर्थन करने में कमी इस क्षेत्र के विकास को धीमा कर रही है। कई φορές शोधकर्ता देश के बाहर बेहतर संसाधनों और वित्तीय सहायता की तलाश में चले जाते हैं, जिससे हमारे देश में ज्ञान और नवाचार का पलायन होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को राष्ट्रीय स्तर पर बायोलॉजिकल रिसर्च के लिए निवेश बढ़ाना चाहिए, जिससे स्थानीय आबादी की बायोलॉजिकल विविधताओं को समझा जा सके। यह कदम शोधकर्ताओं को नवीन दवाओं की खोज में मदद करेगा जो भारतीय रोगियों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हों।

सरकारी नीति निर्माताओं को इस दिशा में नीतिगत सुधार लाने की आवश्यकता है ताकि बायोलॉजिकल अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जा सके और नई दवाओं के विकास को गति दी जा सके। इस प्रकार भारत चिकित्सा नवाचार में वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा।

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