दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

आशा भोसले ने निधन के एक दिन पहले मराठी नाटक देख कर लोगों को कला जीवित रखने की नसीहत दी

आशा भोसले ने निधन से एक दिन पहले नाटक देखा:लोगों को डांट लगाते हुए कला को जिंदा रखने की बात कही थी

मुंबई: महान गायिका आशा भोसले अपने निधन से एक दिन पहले मुंबई में तीन घंटे तक मराठी नाटक देखने पहुंचीं। नाटक के दौरान वह स्टेज पर भी गईं और वहां मौजूद दर्शकों को डांट लगाते हुए कला को जीवित रखने की बात कही। उनका यह भावुक एवं प्रेरणादायक संदेश उनके पोते चिंटू भोसले ने एक इंटरव्यू में साझा किया। आशा भोसले का 12 अप्रैल को 92 वर्ष की उम्र में निधन हुआ।

परिवार के अनुसार, आशा भोसले के अंतिम दिनों में उन्होंने शांति पूर्वक इस दुनिया को अलविदा कहा। उनके बेटे आनंद भोसले और पोते-पोती जनाई व चिंटू भोसले उनके करीब थे। चिंटू ने बताया कि मौत से 3-4 दिन पहले उनकी आखिरी बातचीत हुई थी, जिसमें वे ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध पर चर्चा कर रहे थे। उस शाम उन्होंने आम भी खाए थे।

चिंटू ने कहा, “वह बहुत शांति से गईं। उन्हें कोई दर्द नहीं था। हमने कहा था कि हम अस्पताल जाएंगे, लेकिन उन्होंने नर्म स्वर में कहा था, ‘मुझे थोड़ी देर सोने दो।’ आशा ने अपनी शर्तों पर दुनिया से विदाई ली, जैसे उन्होंने अपनी जिंदगी जिया।”

परिवार ने इस दुखद क्षण से उबरने की कोशिश की जा रही है। चिंटू भोसले ने बताया कि जनाई भोसले, जो आशा के बेहद करीब थीं, इस खबर से टूट गई हैं क्योंकि दोनों ने साथ में कई शो किए थे। परिवार इस गहरे नुकसान के बावजूद आशा भोसले की जिंदादिल जिंदगी को याद करके एकजुट है।

चिंटू ने कहा, “हम सभी साथ बैठते हैं, डिनर करते हैं, बातें करते हैं और हंसते हैं। यही तरीका है जिससे हम इस दुख को सहन कर रहे हैं।”

आशा भोसले ने हमेशा भारतीय संगीत को एक नई दिशा दी और उनकी लोकप्रियता दशकों से बनी रही। उनकी यादें और उनके द्वारा दिया गया संगीत सदैव लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा। उनके अंतिम दिनों तक कला और संस्कृति के प्रति उनका समर्पण प्रेरणादायक है।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!