दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

देव आनंद: भारतीय सिनेमा के स्टाइल आइकन

बॉलीवुड…

देव आनंद भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित और प्यार किए गए अभिनेता, निर्माता और निर्देशक थे। उनका योगदान भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अतुलनीय है। देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को शिमला, हिमाचल प्रदेश में हुआ था। उनका असली नाम देवदत्त पिशोरimal आनंद था, लेकिन उन्होंने स्क्रीन पर खुद को देव आनंद के नाम से प्रस्तुत किया।

देव आनंद की जीवन यात्रा सिर्फ एक फिल्मी करियर तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनका व्यक्तित्व और कार्यशैली भी बहुत हटकर और प्रेरणादायक थी। उनके जीवन का हर पहलू असामान्य था, चाहे वो उनकी फिल्मों के चयन का तरीका हो, उनके अभिनय का अनूठा अंदाज़, या उनका जीवन जीने का तरीका। आइए, जानते हैं देव आनंद के बारे में कुछ और हटकर बातें:

फिल्मों के लिए जुनून और खुद की स्टाइल:

देव आनंद का फिल्मों के प्रति प्यार इतना गहरा था कि उन्होंने कभी भी अपनी अभिनय शैली को नहीं बदला। उनके चेहरे पर हमेशा एक सजीव मुस्कान रहती थी, और उनकी आँखों में एक अनोखी चमक होती थी। उनका अभिनय प्राकृतिक और सरल था, जो दर्शकों को एक अनूठी अनुभूति देता था। इसके अलावा, उनकी फिल्मों में रोमांस और साहस की एक विशेष छवि थी, जो उस समय के अन्य अभिनेता से अलग थी।

स्टाइल आइकन:

देव आनंद अपने समय के सबसे बड़े फैशन आइकन थे। वे एक ऐसे अभिनेता थे जिनकी शैली और पहनावा हर युवा की ख्वाहिश बन जाती थी। उनका ट्रेडमार्क था – ब्लैक जैकेट, हल्के रंग की पैंट, और एक स्टाइलिश हैट। उनकी स्टाइलिंग इतनी आकर्षक थी कि लोगों ने उनके जैसा दिखने की कोशिश की और उनकी फिल्में देखने के बाद वे अपने आप को उसी तरह प्रस्तुत करने की इच्छा रखने लगे।

कभी नहीं थमे, हर उम्र में सक्रिय:

देव आनंद का मानना था कि उम्र सिर्फ एक संख्या है, और उन्होंने इसे अपनी ज़िंदगी में साबित भी किया। वे लगातार काम करते रहे, चाहे उनकी उम्र 60-70 के पार हो चुकी थी। उन्होंने कभी भी यह नहीं माना कि वे बूढ़े हो गए हैं, और यही वजह थी कि वे इतने सालों तक इंडस्ट्री में अपनी छाप छोड़ते रहे।
उदाहरण के लिए, उन्होंने फिल्म ‘लव स्टोरी 2050’ (2008) में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो कि उनके जीवन के आखिरी वर्षों में एक हटकर प्रयास था। इस फिल्म में उन्होंने न केवल अभिनय किया बल्कि इसके निर्माता भी थे।

गीत और संगीत का प्रेम:

देव आनंद का फिल्मों में संगीत से गहरा संबंध था। वे अक्सर फिल्मों में अपने खुद के संगीत के साथ जुड़ा करते थे। उनका विश्वास था कि संगीत और गीत ही फिल्मों को दिल से जोड़ने का एक सशक्त तरीका है। वे कभी भी अपनी फिल्मों में संगीत के मामले में समझौता नहीं करते थे। देव आनंद ने अपनी फिल्म ‘गाइड’ में ‘तुम आ गए हो’ और ‘प्यार का नगमा है’ जैसे शानदार गीत दिए, जो आज भी समय की कसौटी पर खरे उतरते हैं।

दृष्टिकोण और जीवन का दर्शन:

देव आनंद का जीवन दर्शन काफी हटकर था। उन्होंने कभी भी अपने विचारों और विश्वासों से समझौता नहीं किया। उनका मानना था कि हर किसी को अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से जीनी चाहिए, और इसका सबसे अच्छा उदाहरण उनके जीवन में था। उनके लिए सफलता और खुश रहना अधिक महत्वपूर्ण था बजाय इसके कि लोग क्या कहते हैं।
वे जीवन को एक रोमांचक यात्रा मानते थे और यही कारण था कि उनकी फिल्मों में रोमांच, प्रेम, और साहस की कहानियाँ होती थीं। उनकी हर फिल्म में एक संदेश होता था – जीवन में कभी हार मत मानो, और यह उनका व्यक्तिगत आदर्श भी था।

फिल्म इंडस्ट्री के साथ उनका संबंध:

देव आनंद का भारतीय फिल्म इंडस्ट्री से रिश्ता हमेशा प्यार और सम्मान से भरा हुआ था। उन्होंने कभी भी खुद को इंडस्ट्री से दूर नहीं किया। उनका मानना था कि फिल्म इंडस्ट्री एक मंदिर है, जहां हर कलाकार को अपनी मेहनत और कड़ी मेहनत से सम्मान प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने कई बार यह कहा कि वे सिर्फ अभिनेता नहीं थे, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के लिए मिशन के रूप में काम करते थे। वे चाहते थे कि फिल्में सिर्फ मनोरंजन का स्रोत न हों, बल्कि समाज को एक सकारात्मक दिशा देने का माध्यम भी हों।

विदेशों में भी पहचान:

देव आनंद ने अपनी फिल्मों को विदेशों में भी प्रमोट किया और भारतीय सिनेमा को दुनिया भर में पहचान दिलाई। उनकी फिल्मों ने न केवल भारत, बल्कि विदेशों में भी लाखों दर्शकों का दिल जीता। उनकी फिल्में, खासकर ‘गाइड’ और ‘हफ़ी’, ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वाहवाही बटोरी।

उम्र के साथ कभी नहीं थमा काम:

जब उनकी उम्र 80 के पार थी, तब भी उनका उत्साह और जोश वैसा ही था। ‘लव स्टोरी 2050’ जैसी फिल्म बनाना और उसमें अभिनय करना इस बात का प्रमाण था कि वे अपने काम से कभी नहीं थमे। वे फिल्म इंडस्ट्री के उन कुछ लोगों में से थे, जो उम्र के अंतिम पड़ाव तक अपने काम में सक्रिय रहते थे।

देव आनंद न केवल एक अभिनेता थे, बल्कि वे भारतीय सिनेमा के एक आदर्श और प्रेरणा के स्रोत थे। उनका जीवन, उनकी फिल्में, और उनके विचार हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्त्रोत बने रहेंगे। उनका अद्वितीय अभिनय, स्टाइलिश व्यक्तित्व, और साहसी दृष्टिकोण हमेशा याद किए जाएंगे।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!