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कैलाश खेर ने इवेंट में गाने से किया इनकार: बोले- कलाकार को जोकर न बनाएं; क्या सचिन तेंदुलकर से कभी कहोगे छक्का मार कर दिखा दो

कैलाश खेर का इवेंट में गाने से इनकार:बोले- कलाकार को जोकर न बनाएं; क्या सचिन तेंदुलकर से कभी कहोगे छक्का मार कर दिखा दो

दिल्ली, 25 अप्रैल: मशहूर गायक कैलाश खेर ने हाल ही में दिल्ली के ताज पैलेस में आयोजित ‘सिक्स सिग्मा लीडरशिप समिट’ के सातवें संस्करण में एक विशेष टिप्पणी की। उन्होंने इवेंट के दौरान ऑन-डिमांड गाना गाने से साफ मना कर दिया और कहा कि कलाकारों को सार्वजनिक कार्यक्रमों में जोकर समझना गलत है।

कार्यक्रम के दौरान, जब होस्ट ने कैलाश खेर से दर्शकों के मनोरंजन के लिए कुछ गाने की रिक्वेस्ट की, तो वे असहज हो गए और माइक पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “गायक या संगीत को इस रूप में न देखा जाए कि बस दो-चार लाइनें गा दी जाएं या मूड बना दिया जाए। यह सोच गलत है और ऐसी रिक्वेस्ट नहीं करनी चाहिए।”

कैलाश खेर ने अपने विचार स्पष्ट करते हुए क्रिकेट और सेना का उदहारण दिया। उन्होंने कहा, “क्या आप सचिन तेंदुलकर से कहेंगे कि एक छक्का लगाकर दिखा दीजिए? या किसी आर्मी के जवान से कहेंगे कि अपनी पोजीशन लेकर शॉट चलाएं? कलाकार साधक होते हैं, उन्हें जोकर न बनाएं। वे अपने मन के स्वामी होते हैं और उनकी गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।”

इसके पूर्व, कैलाश खेर ने फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान 2003 में फिल्म ‘वैसे भी होता है पार्ट II’ के गाने ‘अल्लाह के बंदे’ से बनाई। इसके बाद उन्होंने अपने बैंड ‘कैलासा’ के साथ कई सुपरहिट गाने दिए जिनमें ‘तेरी दीवानी’ प्रमुख है। वे ‘बाहुबली’ सीरीज के गाने ‘कौन हैं वो’ और ‘जय जयकारा’ के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी अनोखी आवाज और सूफी जेहे अंदाज के कारण वे भारतीय संगीत जगत के सम्मानित गायक हैं।

कैलाश खेर के इस बयान ने कलाकारों के प्रति सामान्य दृष्टिकोण को चुनौती दी है और यह संदेश दिया है कि संगीत और कला का सम्मान किया जाना चाहिए न कि इसे मनोरंजन का साधन समझा जाए। सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों की गरिमा और उनकी स्वतंत्रता का सम्मान करना आवश्यक है ताकि वे अपने काम को पूरी ईमानदारी और भावना के साथ प्रस्तुत कर सकें।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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