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अटाकामा में बढ़ती लाइट पॉल्यूशन से दुनिया के सबसे अंधेरे आकाश को खतरा

Light pollution threatens world’s darkest skies in the Atacama

अटाकामा रेगिस्तान, जो अपनी असाधारण परिस्थितियों के कारण खगोलशास्त्र के लिए एक आदर्श स्थल माना जाता है, आज एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। इस क्षेत्र की साफ, सूखी और अंधेरी रातों ने इसे विश्व भर के वैज्ञानिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र बनाया है, जहां कुछ सबसे महत्त्वाकांक्षी खगोलशास्त्रीय परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। इनमें से विशेष उल्लेखनीय है ‘एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप’ (ELT), जिसे खगोलशास्त्र में नई खोजों के लिए एक मील का पत्थर माना जाता है।

परंतु, अटाकामा के विश्वप्रसिद्ध अंधेरे आकाश को अब प्रकाश प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है। प्रकाश प्रदूषण वह समस्या है जिसमें मानव निर्मित अनावश्यक प्रकाश वातावरण में फैल जाता है, जिससे खगोलीय वस्तुओं का अवलोकन मुश्किल हो जाता है। यह न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रभावित करता है, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय जीवनशैली पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे आसपास के क्षेत्रों में शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे अटाकामा की साफ और अंधेरी रातें धुंधली पड़ रही हैं। इससे दूरबीनों और टेलीस्कोपों की संवेदनशीलता प्रभावित हो रही है, जो ग्रहों, नक्षत्रों और गैलेक्सियों का सूक्ष्म अध्ययन करने के लिए आवश्यक है।

अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने इस पर चिंता जताई है और प्रकाश प्रदूषण को कम करने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कदम उठाने की वकालत की है। इन पहलों में पर्यावरणीय नियमों को सख्त बनाना, सार्वजनिक जागरूकता फैलाना और ऊर्जा कुशल और दिशानिर्देशित प्रकाश स्रोतों का उपयोग करना शामिल है।

अटाकामा का यह रेगिस्तान न केवल खगोल विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पृथ्वी के उन कुछ स्थानों में से एक है जहां आकाश की शांति और प्राकृतिक सुंदरता अब भी बरकरार है। इसे संरक्षित करना, वैज्ञानिक खोजों को जारी रखना और स्थानीय पर्यावरण को बचाना हम सब की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां इस अनमोल खगोलीय खजाने को खो सकती हैं।

इस प्रकार, अटाकामा में बढ़ती प्रकाश प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लिया जाना चाहिए ताकि विश्व के सबसे अंधेरे आकाश की सुंदरता और वैज्ञानिक महत्व दोनों बनी रह सकें।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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