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ISRO आम जनता को भी भेजेगा अंतरिक्ष में: गगनयान मिशन के दूसरे बैच में शामिल होंगे एस्ट्रोनॉट, ट्रेनिंग में लगेगी साढ़े 4 साल

ISRO अब आम लोगों को भी अंतरिक्ष में भेजेगा:गगनयान मिशन के एस्ट्रोनॉट के दूसरे बैच में शामिल होंगे, ट्रेनिंग में साढ़े 4 साल लगेंगे

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पहली बार अपने एस्ट्रोनॉट कैडर को आम नागरिकों के लिए खोलने का महत्त्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसरो की एस्ट्रोनॉट सिलेक्शन कमेटी ने इसके लिए सिफारिश कर दी है, जिसमें कहा गया है कि गगनयान मिशन के दूसरे बैच में वायुसेना के 6 पायलटों के साथ-साथ 4 सिविलियन स्पेशलिस्ट भी शामिल किए जाएंगे। ये सिविलियन STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ) बैकग्राउंड के होंगे।

पहले बैच में केवल पायलट शामिल थे, जबकि दूसरे बैच में आम लोगों को भी मौका दिया जाएगा। हालांकि, इन सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स को सीधे अंतरिक्ष में नहीं भेजा जाएगा। योजना है कि चौथे गगनयान मानव मिशन के दौरान ही वे चालक दल का हिस्सा बनेंगे। पूरी ट्रेनिंग प्रक्रिया, जिसमें चयन से लेकर मिशन की तैयारी तक शामिल है, लगभग साढ़े चार साल यानी 54 महीने की होगी।

कमेटी ने लक्ष्य रखा है कि दूसरे बैच को अगले 72 महीनों में पूरी तरह तैयार कर लिया जाए और तीसरे बैच के लिए 96 महीनों का समय निर्धारित किया गया है। गगनयान मिशन ISRO का पहला मानवयुक्त क्रू फ्लाइट प्रोग्राम है, जिसे 2027 तक लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मिशन लगभग 3 दिनों का होगा और इसमें तीन एस्ट्रोनॉट 400 किलोमीटर की ऊंचाई तक यात्रा करके सुरक्षित पृथ्वी पर लौटेंगे।

ISRO के पहले बैच में चार एस्ट्रोनॉट शामिल थे, जो भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट थे। इनमें एयर कमांडर प्रशांत बी नायर, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन और ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप शामिल हैं। दूसरे बैच में इंडियन आर्मी के लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट भी शामिल किए जा सकते हैं। तीसरे बैच में कुल 12 एस्ट्रोनॉट होंगे, जिनमें से 10 सिविलियन होंगे। यह बदलाव भारतीय मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के विस्तार की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

ISRO अब एक स्थायी एस्ट्रोनॉट कैडर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य वर्ष में दो मानव मिशन भेजना और कुल 40 एस्ट्रोनॉट्स का एक मजबूत पूल तैयार करना है, जो राष्ट्रीय आवश्यकताओं और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए काम आएगा।

हालांकि, इस महत्वपूर्ण मिशन की तैयारियों के बीच ISRO को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। देश में अभी केवल एक अस्थायी ट्रेनिंग सेंटर उपलब्ध है, जबकि स्थायी सुविधा बनाने की प्रक्रिया अभी प्रारंभ में है। इसी के साथ ECLSS (पर्यावरण नियंत्रण और जीवन रक्षक प्रणाली) जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों के विकास में भी देरी है, जो मनुष्य के अंतरिक्ष में सुरक्षित जीवन के लिए आवश्यक हैं।

इस प्रकार, गगनयान मिशन के तहत ISRO न केवल भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है, बल्कि आम जनता को भी अंतरिक्ष की दुनिया से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठा रहा है। यह कदम भारतीय विज्ञान और तकनीक के विकास को बढ़ावा देगा और युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा बनेगा।

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