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एग्जाम से दो दिन पहले द्रष्टि धुंधली थी: 10% विजन वाली अनिष्का ने CBSE में 92% अंक हासिल किए, मैग्निफायर डिवाइस से पढ़ाई की

एग्जाम से 2 दिन पहले सब धुंधला दिख रहा था:दुनिया को सिर्फ 10% देखने वाली अनिष्का CBSE में 92% लाई, मैग्निफायर डिवाइस से पढ़ाई की

हाथरस, उत्तर प्रदेश: 16 साल की अनिष्का गोयल जिन्होंने सिर्फ 10% दृष्टि क्षमता के बावजूद इस वर्ष CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा में शानदार 92.6% अंक प्राप्त किए हैं। अनिष्का की कहानी प्रेरणादायक है क्योंकि उन्होंने जनरल कैटेगरी से परीक्षा देकर न केवल अपने आत्मविश्वास को साबित किया, बल्कि अपने साथियों से बेहतर प्रदर्शन भी किया।

दैनिक भास्कर से हुई खास बातचीत में अनिष्का ने अपनी परीक्षा की तैयारी और पढ़ाई के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनकी दृष्टिबाधा के कारण किताबें सीधे पढ़ना उनके लिए आसान नहीं था, इसलिए उन्होंने मैग्निफाइंग ग्लास और विशेष रूप से ऑडियो फॉर्मेट में पढ़ाई पर अधिक निर्भरता रखी।

“मैंने खुद अपना आंसर राइटिंग करना चुना क्योंकि मैं जानती थी कि कौन से हिस्से को अंडरलाइन करना है और कैसे पॉइंटर्स में लिखना है। अन्य लोग मेरी सोच और तरीका इसे समझ नहीं पाते,” अनिष्का ने बताया।

उन्होंने पढ़ाई के दौरान अपनी आँखों पर अधिक जोर न पड़े इसलिए नियमित ब्रेक भी लिया। लगातार 2-3 घंटे से ज्यादा पढ़ाई नहीं करतीं, हर आधे घंटे बाद 10-15 मिनट की पावर नैप लेकर अपनी आँखों को आराम देतीं।

परीक्षा से दो दिन पहले उनकी डिजिटल मैग्निफाइंग ग्लास खराब हो गया था जिससे पढ़ाई में काफी परेशानी हुई और उनके तीन-चार दिन बर्बाद हो गए। उन्होंने बताया कि उस समय उनका परिवार, खासतौर पर उनकी माँ और छोटी बहन, पढ़कर उन्हें तैयारी में मदद करते रहे।

गणित विषय में उन्हें पहले काफी दिक्कत होती थी और कई बार जवाबों में त्रुटि के कारण सवालों पर अधिक समय खर्च करना पड़ता था। इसी वजह से बोर्ड परीक्षा में कुछ नंबर छूट गए।

परीक्षा के दौरान अनिष्का ने रीडर की मदद से क्वेश्चन को सुनकर और फिर खुद के हाथों से जवाब लिखने का तरीका अपनाया। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा आंखों के करीब एग्जाम पैड लेकर ही लिखाई की है, जो अब उनकी आदत बन चुकी है।

उनका प्रथम सपना कार्डियोलॉजिस्ट बनने का था, लेकिन अपनी स्थिति को देखते हुए अब वे इंजीनियरिंग की ओर अग्रसर हैं। 11वीं में उन्होंने फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषय चुने हैं। माता-पिता ने उन्हें मैथ्स छोड़ने को कहा था, लेकिन अनिष्का ने अपनी रुचि के कारण इसे जारी रखा।

उनके स्कूल टीचर्स पहले से ही उनके अच्छे परिणामों की भविष्यवाणी कर रहे थे और कुछ ने तो उनके 90% से अधिक अंक आने पर शर्त भी लगाई थी।

कोविड-19 महामारी के दौरान घर से पढ़ाई की वजह से अनिष्का की पढ़ाई में रुचि और भी बढ़ गई। बचपन से दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने कभी अपनी कड़ी मेहनत से हार नहीं मानी।

पढ़ाई के अलावा अनिष्का को गाने सुनना, सिंगिंग करना और फिल्में देखना पसंद है। वे राजकुमार हिरानी की प्रशंसक हैं और ह्रितिक रोशन को अपना पसंदीदा अभिनेता मानती हैं।

अनिष्का की यह कहानी न केवल उनके आत्मविश्वास की मिसाल है, बल्कि यह दिखाती है कि कठिनाइयों के बावजूद अगर सही दृष्टिकोण और मेहनत हो तो लक्ष्य हासिल करना संभव है। उनका सपना इंजीनियर बनकर आगे IAS ऑफिसर बनने का है, जो समाज में अपना नाम रोशन करेंगे।

लेखक – सोनाली राय

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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