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शून्य सहनशीलता अस्वीकार्य है — यूपीईएसएससी अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने कहा, ‘हम पेपर लीक रोकने के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं’

Zero tolerance is non-negotiable — we are using AI to stop paper leaks’: UPESSC Chairman Prashant Kumar

उत्तर प्रदेश में परीक्षा प्रणाली की स्वच्छता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। बार-बार उभर रही परीक्षा घोटालों की घटनाओं के बीच, यूपी कर्मचारी चयन आयोग (UPESSC) के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने अपनी विशेष बातचीत में नई टेक्नोलॉजी और सख्त नियमों के इस्तेमाल की जानकारी दी।

डॉ. कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने परीक्षा संचालन की विधियों में तकनीकी हस्तक्षेप बढ़ाए हैं ताकि पेपर लीक, तनाव और अन्य अनियमितताओं को अधूरा किया जा सके। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस नियंत्रण कक्ष, कागजी सामग्री की एन्क्रिप्टेड हैंडलिंग, बायोमेट्रिक हस्ताक्षर, और कड़ी जांच-पड़ताल की व्यवस्था शामिल है।

वे कहते हैं, “हमारी नीतियों में शून्य सहनशीलता है। कोई भी पेपर लीक या परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। AI नियंत्रण कक्ष वास्तविक समय में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देते हैं, इसके साथ ही बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से परीक्षार्थियों की पहचान को सुनिश्चित किया जाता है।”

डॉ. कुमार ने आगे विस्तार से बताया कि केवल तकनीकी मदद से ही नहीं, बल्कि संस्थागत स्तर पर भी सुधार किए जा रहे हैं। आयोग ने परीक्षा नियमों को सख्त किया है और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, परीक्षा केंद्रों के चयन, उनके संचालन और पर्यवेक्षण को भी बेहतर बनाया गया है।

उनका कहना है कि यूपी सरकार की दृष्टि आगे बढ़कर एक ऐसा मूल्यांकन ढांचा तैयार करने की है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप हो। इसके तहत, परीक्षा प्रणाली को केवल ज्ञान की जांच नहीं, बल्कि क्षमता आधारित, पारदर्शी और सहज विकसित करने वाला बनाया जाएगा। यह मॉडल दीर्घकालिक होगा और छात्रों के कौशल विकास पर केंद्रित रहेगा।

डॉ. कुमार के अनुसार, यह बदलाव शिक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करेंगे और परीक्षार्थियों तथा अभिभावकों के मन में यूपी बोर्ड परीक्षा की निष्पक्षता और गुणवत्ता के प्रति भरोसा जागृत करेंगे। “जब तक हम जड़ तक सुधार नहीं करेंगे, तब तक इस समस्या का समाधान संभव नहीं,” वे कहते हैं।

राज्य सरकार की यह पहल न केवल यूपी के लिए बल्कि पूरे देश के लिए परीक्षा सुरक्षा और विश्वसनीयता की दिशा में एक मिसाल बन सकती है। आने वाले वर्षों में यूपीईएसएससी के कदमों पर पूरी शिक्षा जगत की निगाहें टिकी होंगी।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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