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महाराष्ट्र में चार वर्षीय स्नातक सुधार के साथ हार्वर्ड स्टाइल कॉलेज लचीलापन: मंत्री चंद्रकांत पाटिल

Maharashtra Plans Harvard-Style Flexibility in Colleges with 4-Year UG Reform: Minister Chandrakant Patil

महाराष्ट्र में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत

महाराष्ट्र सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने हाल ही में ET एजुकेशन के साथ एक विशिष्ट साक्षात्कार में राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में होने वाले व्यापक सुधारों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि राज्य जनवरी 2026-27 से राष्ट्रीय शैक्षिक नीति 2020 के अनुरूप चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत हार्वर्ड स्टाइल लचीलापन एवं नवीन पद्धतियों को अपनाया जाएगा।

मंत्री ने बताया कि चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में “ऑनर्स” और “ऑनर्स विद रिसर्च” डिग्रियों की शुरुआत के साथ अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट सिस्टंम (ABC) की भी व्यवस्था की जाएगी। यह प्रणाली छात्रों को विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में प्राप्त क्रेडिट्स को जोड़ने और एकीकृत करने की सुविधा देगी, जिससे वे अपनी पढ़ाई को अधिक लचीलेपन से पूरा कर सकेंगे।

साथ ही, multiple entry-exit pathways के तहत विद्यार्थी अपनी जरूरत, इच्छानुसार कभी भी लर्निंग पैथ में प्रवेश या बाहर निकल सकेंगे, जिससे उनकी शिक्षा अधिक सुलभ और अनुकूल होगी। यही नहीं, इस नई संरचना में इंडस्ट्री-लिंक्ड लर्निंग पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के अवसर बेहतर मिल सकेंगे।

मंत्री पाटिल ने यह भी स्पष्ट किया कि ये प्रयास न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए हैं, बल्कि राज्य को वैश्विक शिक्षा और ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षा की दिशा में भी एक बड़ा कदम हैं। महाराष्ट्र सरकार शिक्षा की कीमतें कम करने, पहुँच बेहतर बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के लिए काम कर रही है।

चंद्रकांत पाटिल ने कहा, “हम चाहते हैं कि महाराष्ट्र का हर युवा विश्व स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सके और अपने करियर में सफल हो। इसके लिए हमें शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, गुणवत्तापूर्ण और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना होगा।” उन्होंने NEP 2020 के तहत शिक्षा में इन नवाचारों को लागू करना राज्य की प्राथमिकता बताया।

इस नई शिक्षा रणनीति के तहत, महाराष्ट्र यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे जो भविष्य की चुनौतियों के अनुकूल होंगे। यह न केवल छात्रों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध करवाएगा, बल्कि राज्य की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति में भी सहायक होगा।

समाज में अकादमिक बदलावों के प्रति उत्साह और उम्मीदें बढ़ी हैं, जिसमें युवाओं का भविष्य संवारने की बड़ी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। महाराष्ट्र द्वारा अपनाया गया ये नया मॉडल शिक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल साबित हो सकता है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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