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पश्चिम एशिया संकट के कारण अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई चार साल के निचले स्तर के निकट पहुंचा

West Asia crisis pushes down April manufacturing PMI to second-lowest in 4 years

नई दिल्ली, 28 अप्रैल 2026: पश्चिम एशिया में जारी संकट के प्रभाव से अप्रैल 2026 में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई (पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) चार वर्षों में दूसरे सबसे निचले स्तर पर आ गया है। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि हालांकि मार्च के मुकाबले परिस्थितियां कुछ बेहतर थीं, किन्तु नए ऑर्डर और उत्पादन अभी भी ऐतिहासिक रूप से कम रह गए हैं। साथ ही, इस दौरान इनपुट की कीमतों में भी तेज़ी से वृद्धि देखी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में उत्पादन गतिविधियों में मामूली सुधार के बावजूद मांग में ठहराव बना हुआ है। नए आदेशों की संख्या में गिरावट ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ाया है। इसी वजह से उत्पादन स्तर भी सामान्य से नीचे बना रहा, जो आर्थिक विकास के लिए चिंता का विषय है।

महालनेकटम आज़ाद वित्तीय संस्थान के प्रमुख अर्थशास्त्री डॉ. विनय भारद्वाज ने कहा, “पश्चिम एशिया की जटिल परिस्थितियां, विशेषकर तेल की कीमतों में अस्थिरता, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर डाल रही हैं, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दबाव बना हुआ है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इनपुट सामग्री की लागत में तेजी से वृद्धि ने उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है, जिससे कंपनियों की लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में स्थिरता, साथ ही आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्स्थापन से ही मैन्युफैक्चरिंग PMI में सुधार संभव होगा। वर्तमान में व्यापारिक माहौल में अनिश्चितता बनी हुए चलते निवेशकों और निर्माताओं की नज़रें भविष्य की नीतियों और बाजार संकेतों पर टिकी हैं।

वित्त मंत्रालय तथा उद्योग विभाग ने भी हाल ही में यह स्वीकार किया है कि वैश्विक परिस्थिति के कारण घरेलू उत्पादन सेक्टर को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए नए उपायों पर विचार शुरू कर दिया है, ताकि आगामी महीनों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को स्थिरता मिल सके।

अप्रैल में इनपुट कीमतों में वृद्धि के चलते कई मैन्युफैक्चरर्स को अपनी उत्पादन क्षमता कम करनी पड़ी। इससे न केवल उत्पादन प्रभावित हुआ, बल्कि रोजगार सृजन पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। यह स्थिति आने वाले दिनों में नौकरियों के बाजार पर भी दबाव डाल सकती है।

इस संपूर्ण परिदृश्य में उद्योग जगत और नीति निर्माता दोनों के लिए यह आवश्यक है कि वे मिलकर ऐसे समाधान खोजें, जो आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को दूर करते हुए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को पुनर्जीवित कर सकें। केवल तभी भारत उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा कायम रख पाएगा।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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